श्री झूलेलाल मंदिर में गुरुवार से सिंधी समाज के सबसे बड़े और पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों में से एक 'चालीहा व्रत महोत्सव' की भव्य शुरुआत हो गई है। झूलेलाल अखंड ज्योति ट्रस्ट द्वारा विधि-विधान और परंपरा के अनुसार अखंड ज्योति के पट आगामी 40 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान श्रद्धालु और भक्तजन मंदिर के भीतर विराजमान अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर सकेंगे। मंदिर के पट अब 40 दिनों के कठिन उपवास और साधना के बाद आगामी 25 अगस्त को खोले जाएंगे।
मां गंगा से आज्ञा लेकर बंद किए गए अखंड ज्योति के पट
झूलेलाल अखंड ज्योति ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक मखीजा ने बताया कि चालीहा साहब व्रत के पहले दिन दोपहर को ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी और सिंधी समाज के गणमान्य लोग एकत्रित हुए। परंपरा के अनुसार, सभी पदाधिकारियों ने सबसे पहले पतित पावनी मां गंगा के तट पर जाकर अखंड ज्योति को विश्राम देने और 40 दिवसीय अनुष्ठान शुरू करने की आज्ञा ली।
40 दिनों तक होगा बहराणा साहब का पूजन और कठिन साधना
अध्यक्ष अशोक मखीजा ने आगे जानकारी दी कि पट बंद रहने की इस अवधि के दौरान मंदिर परिसर में लगातार 40 दिनों तक पवित्र 'झूलेलाल ग्रंथ' का पाठ किया जाएगा। सिंधी समाज के लोग इन 40 दिनों तक बेहद कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत चालीहा साहब रखेंगे।