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Kanpur: रामबाग झूलेलाल मंदिर में अखंड ज्योति के पट 40 दिनों के लिए बंद, सिंधी समाज का चालीहा व्रत महोत्सव शुरू

Thu, 16 Jul 2026 02:29 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: रामबाग स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में बुधवार को झूलेलाल अखंड ज्योति ट्रस्ट की ओर से धार्मिक अनुष्ठान के बीच अखंड ज्योति के पट 40 दिनों के लिए बंद कर दिए गए। इसके साथ ही सिंधी समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व चालिहा व्रत महोत्सव का शुभारंभ हो गया।
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झूलेलाल मंदिर में नाचते भक्त - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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श्री झूलेलाल मंदिर में गुरुवार से सिंधी समाज के सबसे बड़े और पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों में से एक 'चालीहा व्रत महोत्सव' की भव्य शुरुआत हो गई है। झूलेलाल अखंड ज्योति ट्रस्ट द्वारा विधि-विधान और परंपरा के अनुसार अखंड ज्योति के पट आगामी 40 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान श्रद्धालु और भक्तजन मंदिर के भीतर विराजमान अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर सकेंगे। मंदिर के पट अब 40 दिनों के कठिन उपवास और साधना के बाद आगामी 25 अगस्त को खोले जाएंगे।

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मां गंगा से आज्ञा लेकर बंद किए गए अखंड ज्योति के पट

झूलेलाल अखंड ज्योति ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक मखीजा ने बताया कि चालीहा साहब व्रत के पहले दिन दोपहर को ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी और सिंधी समाज के गणमान्य लोग एकत्रित हुए। परंपरा के अनुसार, सभी पदाधिकारियों ने सबसे पहले पतित पावनी मां गंगा के तट पर जाकर अखंड ज्योति को विश्राम देने और 40 दिवसीय अनुष्ठान शुरू करने की आज्ञा ली।

इसके बाद मंदिर परिसर में भगवान श्री झूलेलाल जी की भव्य महाआरती उतारी गई। पूरा मंदिर परिसर 'जय झूलेलाल' और 'आयो लाल सबई चओ झूलेलाल' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। महाआरती और जयकारों के बीच पूरे आदर-सत्कार के साथ अखंड ज्योति के पट 40 दिनों के लिए बंद कर दिए गए।

40 दिनों तक होगा बहराणा साहब का पूजन और कठिन साधना

अध्यक्ष अशोक मखीजा ने आगे जानकारी दी कि पट बंद रहने की इस अवधि के दौरान मंदिर परिसर में लगातार 40 दिनों तक पवित्र 'झूलेलाल ग्रंथ' का पाठ किया जाएगा। सिंधी समाज के लोग इन 40 दिनों तक बेहद कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत चालीहा साहब रखेंगे।

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इस दौरान समाज के लोग हर दिन बहराणा साहब (एक विशेष थाल जिसमें आटे का दीया, मिश्री, फल और इलाइची सजाई जाती है) का पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन करेंगे। इस 40 दिवसीय महोत्सव के दौरान समाज में सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन और विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाएंगी।
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