जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां बिजली तो दूर, सड़क तक का नामोनिशान नहीं
है। आधुनिकीकरण के दौर से पूरी तरह से अछूता है चालहा गांव। तमाम कोशिशों
के बावजूद अधिकारियों ने जब कोई रूख नहीं दिया तो गांव वासी इसे अपनी
किस्मत मान खामोश है।
अकबरपुर सदर तहसील क्षेत्र के लगभग एक हजार आबादी
वाले चालहा गांव में आजादी के 67 वर्ष बाद बिजली आना तो दूर गांव में सड़क
तक नहीं है। एक कच्चे पाइप पर मिट्टी डालकर निकलने का रास्ता बना लिया है।
गांव के लोग अब विकास की आस ही छोड़ बैठे है।
अमर उजाला के समाचार
प्रतिनिधि ने जब गांव पहुंचकर वहां पर मूलभूत सुविधाएं देखीं, बिजली सड़क
पानी सबसे विहीन है। गांव से बाहर निकल संपर्क मार्ग तक पहुंचने के लिए कोई
रास्ता नहीं है।
संदीप कुमार बताते है कि गांव के लोग प्रतिदिन श्रमदान कर
रास्ते पर मिट्टी डालकर उसे ठीक करते हैं। जिसके बाद रोजाना निकलना हो
पाता है।
इधर, रिंद नदी चालहा वासियों के लिए मुसीबत लाती है। तीनों ओर
जल धाराओं से घिरे चाहला गांव बरसात के दिनों में आफत में फंसा रहता है।
नदी की जलधारा बढ़ने पर पहले निकासी का मार्ग बंद हो जाता है। पानी अपने
साथ पुलिया को बहाकर ले जाता है। गांव से बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद
हो जाते हैं।
गांव के बलवान यादव कहते हैं कि ऐसे दिनों में वह सब मिलकर
दुआ करते हैं कि गांव में कोई बीमार न पड़े वर्ना बिना उपचार के उसे मुसीबत
झेलनी पड़ सकती है। शिवकुमार का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि कोई
उनकी फरियाद सुनेगा।