चैत्र नवरात्र विशेष ज्योतिषीय संयोग के साथ 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेंगे। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि तथा शांति की कामना करेंगे। इस वर्ष मां भगवती का आगमन पालकी पर होगा, जिसे शुभ और समृद्धि का संकेत माना जाता है। वहीं विदाई हाथी पर होगी।
पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि गुरुवार की सुबह छह से 8:30 बजे तक कलश स्थापना का उत्तम मुहूर्त है, जबकि उषाकाल में देवी का आवाहन सबसे अधिक शुभ फल देने वाला माना जाता है। कलश स्थापना के लिए चांदी, तांबा या मिट्टी के कलश का उपयोग करना चाहिए। स्टील या एल्युमिनियम के कलश का परहेज करना चाहिए। जिस स्थान पर कलश स्थापित किया जाए, वहीं नियमित पूजन करना आवश्यक है। यदि किसी कारणवश घर से बाहर जाना पड़े, तो रात विश्राम वापस घर पर ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूतक लगे होने पर कलश स्थापना टाल देनी चाहिए, लेकिन स्थापना के बाद यदि सूतक लगे तो पूजन में कोई दोष नहीं माना जाएगा। अखंड दीपक में कालिख जमने पर उसे साफ कर फिर प्रज्वलित किया जा सकता है। आरती के दौरान यदि चुनरी जल जाए तो तुरंत बदल देनी चाहिए। देवी की मूर्ति या कलश खंडित होने पर उसे विधिपूर्वक जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। इस बार देवी की विदाई हाथी पर होगी, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इसी दिन से हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) का आरंभ होगा। इसे नई ऊर्जा, नए संकल्प और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष विक्रम संवत 2083 रौद्र नाम से जाना जाएगा। 19 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 10:16 बजे तक रहेगा। यदि इस समय स्थापना संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 से 12:41 बजे तक किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित पीएन द्विवेदी के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि अमावस्या में क्षय होने के कारण नवसंवत्सर की शुरुआत उदयातिथि के आधार पर इसी दिन मानी जा रही है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, साथ ही भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार और सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबर 6:52 से 7:43 बजे तक रहेगा। महाअष्टमी का व्रत 26 मार्च (गुरुवार) को रखा जाएगा, जबकि महानवमी पर शुक्रवार को पूजन और हवन होगा।