रेलवे बोर्ड के करीब डेढ़ साल चेयरमैन रहेे अश्विनी लोहानी की सुनवाई भी रेलवे ने नहीं की। कानपुर में बीते उनके बचपन की वजह से उनका शहर से खास लगाव था। वह कई बार कानपुर आए और यहां पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने के लिए कई काम कराने के निर्देश दिए। बावजूद इसके उन कामों की शुरुआत तक कानपुर में नहीं हुई। बुधवार को इस अहम पद पर उनका अंतिम दिन था वह रिटायर हो गए और अब नए सीआरबी वीके यादव बने हैं। वह गोरखपुर के हैं। रेलवे में किए गए उनके सुधार और कानपुर को रेलवे के मानचित्र में प्रमुख स्थान देने की उनकी मंशा पर अफसरों की कार्यशैली से सवाल खड़ा हो गया है।
कानपुर रेलवे को ऐसा देखना चाहते थे लोहानी
- पूर्व चेयरमैन ने दो बार कानपुर सेंट्रल स्टेशन और जिले के दूसरे रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया था।
- अश्विनी लोहानी ने कानपुर में शहरी क्षेत्र में पड़ी रेल लाइनों के किनारे दोनों तरफ दीवारें उठाने के निर्देश दिए थे, जिससे कि आए दिन ट्रेनों से मवेशियों के कटने समेत अन्य दुर्घटनाएं न हों। नई जगह दीवारें तो खड़ी नहीं हुईं बल्कि जीटी रोड पर अनवरगंज से कल्याणपुर तक जो दीवारें बनी हैं, वह भी जगह जगह से टूट गईं।
- प्रदेश के पहले महिला रेलवे स्टेशन गोविंदपुरी पर एक भी यात्री शौचालय न होने का मामले पर भी सीआरबी की नहीं सुनी गई। सितंबर महीने में कानपुर आए सीआरबी ने अफसरों से पूछकर आश्वासन दिया था कि यहां तीन महीने में यात्री शौचालय बना दिया जाएगा। इस स्टेशन पर महिला और पुरुष किसी भी यात्री के लिए शौचालय न होने की बात से वह हैरान भी हुए थे। तीन महीने बीतने के बाद भी शौचालय के लिए एक ईंट नहीं रखी गई।
- अफसरों के बंगलों में अभी भी रेलवे के गैंगमैन, ट्रैकमैन समेत चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी चाकरी कर रहे हैं। अफसरों के बंगलों में रसेाइया, धोबी, माली और ड्राइविंग का काम भी रेलवे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी करते हैं। सीआरबी का निर्देश था कि रेलवे कर्मचारियों से उनका मूल काम लिया जाए लेकिन कानपुर में भी अफसर नहीं चेते। रेलवे में पहले की तरह वीआईपी कल्चर जारी है। उम्मीद है कि नए सीआरबी इसे खत्म कर सकेंगे।
लोहानी का है कानपुर से गहरा नाता
सीआरबी (चेयरमैन रेलवे बोर्ड) रहे अश्विनी लोहानी का कानपुर से गहरा नाता रहा। उनकी शुरुआती शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कैंट के सेंट एलॉयसिस से हुई। उनके पिता बसंत कुमार लोहानी वीआईपी रोड के टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट में शिक्षक थे। अश्विनी लोहानी अपने पिता के साथ हर्ष नगर में रामसनेही कटियार के मकान में किराये पर रहते थे। आज भी उनकी नजदीकियां कानपुर से हैं। वह जब भी कानपुर आते हैं, टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट जाते हैं।