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Kanpur News: भूसे से बने जेल ने जगाई मुंहासों पर असर की उम्मीद

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कानपुर। गेहूं के भूसे से बने विशेष तरह के जेल ने मुंहासों पर असर की उम्मीद जगाई है।
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इसका प्रयोगशाला में परीक्षण कर लिया गया है, जबकि मानव शरीर में परीक्षण होना बाकी है। यह सफलता छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के छात्र सुब्रत पांडेय को शोध में मिली है। उन्होंने गेहूं के भूसे से तैयार लिग्निन नैनोपार्टिकल्स और पोस्टबायोटिक्स को मिलाकर ऐसा जेल विकसित किया गया है जो न केवल मुंहासों को कम करेगा बल्कि साइड इफैक्ट को भी रोकेगा। सुब्रत के इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल फ्रंटियर्स इन मैटीरियल में प्रकाशित किया गया है।
सुब्रत ने यह शोध स्कूल ऑफ लाइफ साइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी में डॉ. राकेश कुमार शर्मा के निर्देशन में किया। शोध में गेहूं के भूसे में मौजूद लिग्निन से नैनो स्तर के कण तैयार किए गए। इन्हें लैक्टीप्लांटिबाकिलस प्लांट्रम से प्राप्त पोस्टबायोटिक्स के साथ मिलाकर एलोवेरा आधारित जेल तैयार किया गया। प्रयोगशाला में इस फॉर्म्यूलेशन को मुंहासों से जुड़े प्रमुख बैक्टीरिया कटीबैक्टीरियम एक्नेस पर जांचा। परीक्षण में बैक्टीरिया की वृद्धि को नियंत्रित करने के साथ बायोफिल्म बनने पर भी असर देखा गया। बायोफिल्म बैक्टीरिया की ऐसी परत होती है, जो उन्हें सतह पर टिके रहने में मदद करती है।
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अभी मानवों पर परीक्षण बाकी
शोध का यह परिणाम फिलहाल प्रयोगशाला स्तर तक सीमित है। इसे मुंहासों के उपचार के रूप में इस्तेमाल करने से पहले त्वचा पर सुरक्षा, जेल की स्थिरता और मानव शरीर में प्रभाव से जुड़े परीक्षण करने होंगे। शोधकर्ताओं के मुताबिक आगे के अध्ययनों के बाद ही इसके चिकित्सीय उपयोग की संभावना स्पष्ट हो सकेगी। शोध की खास बात यह है कि इसमें कृषि अवशेष को उपयोगी नैनो सामग्री में बदलने का प्रयास किया गया है।
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