यूपी के महोबा जिले में सिपाही, दरोगा स्तर तक के पुलिस वालों की छुट्टी, जीपीएफ जैसे मामलों पर त्वरित फैसले के लिए एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने जिला स्तर पर एक सेल (प्रकोष्ठ) का गठन किया है। सेल की कमान इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र को दी है। इस बीच छुट्टी न मिलने की व्यथा रोते हुए वीडियो क्लिप के जरिए अफसरों तक पहुंचाने वाला सिपाही लक्ष्मण 45 दिन के अवकाश की स्वीकृति के बाद गृह जनपद उरई रवाना हो गया।
एसपी की नई पहल का असर पहले दिन सोमवार को ही देखने को मिला। सिंगल विंडो ऑपरेशन प्रक्रिया से संचालित होने वाले सेल तक पहले दिन 45 पुलिस वालों ने अपने लंबित मामले रखे। वेतन, पेंशन, अवकाश, जीपीएफ और बीमा फंड आदि के विषय इस सेल तक लाए जा सकेंगे। पहले दिन आई समस्याओं में जीपीएफ से भुगतान की अर्जियां लंबित होने की अधिकता थी।
सेल प्रभारी इंस्पेक्टर ने कागजी जरूरतें पूरी कराते हुए 21 शिकायतों का हाथोंहाथ निपटारा कराया। बाकी में त्वरित निस्तारण का भरोसा दिया। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनमें कागजी कवायद पुलिस मुख्यालय से होनी है। एसपी ने बताया कि उन्हें स्थानीय सकारात्मक रिपोर्ट के साथ मुख्यालय भेजा जा रहा है। बता दें कि सिपाही लक्ष्मण की छुट्टी की मंजूरी के साथ जीपीएफ भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार पुलिस लाइन के अकाउंटेंट को एक दिन पहले ही निलंबित कर दिया गया था।
मंत्री ने डांटा तो छोड़ भागे एस्कार्ट के सिपाही
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त मंत्री) बाबूराम निषाद ने आवास में पान और मसाला खाकर थूकने पर एस्कार्ट टीम के तीन सिपाहियों को फटकार लगाई तो तीनों उनके आवास की ड्यूटी छोड़कर चले गए। निषाद के मुताबिक उनकी सुरक्षा में सिपाही शैलेंद्र, संतोष, इरफान की ड्यूटी थी। इसके बाद उन्हें नगर और पीएसओ के साथ ही उन्नाव जाना पड़ा। डीजीपी से फोन पर इसकी शिकायत की है। प्रभारी एसपी संतोष कुमार सिंह ने सीओ रजनीश उपाध्याय को इसकी जांच सौंपी है।