गुजराती समाज के लोगों ने रविवार को बिठूर के फार्म हाउस में धूमधाम से ‘उत्तरायण’ पर्व मनाया। महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने गुनगुनी धूप में पतंग, खेल और पकवानों का जमकर मजा लिया।
कार्यक्रम का संयोजन गुजराती समाज संगठन के जनरल सेक्रेटरी शरद जानी, कल्चरल सेक्रेटरी विनय और पीआरओ शैलेश दोशी ने किया। बता दें मकर संक्रांति के दिन सूर्य के ‘उत्तरायण’ होने की खुशी में गुजराती समाज हर साल ‘उत्तरायण पर्व’ मनाता है।
दीपावली के दूसरे दिन मनाते हैं नया साल
गुजराती समाज में हर साल दीपावली के दूसरे दिन परेवा को नया साल मनाया जाता है। अशोक सावला ने बताया कि सभी लोग एक एकत्र होकर पूजा पाठ कर नये साल की खुशी मनाते हैं।
नवरात्र-शरद पूर्णिमा पर धूम
इसके अलावा जनवरी में उत्तरायण, शारदीय नवरात्र, शरद पूर्णिमा तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। कई परिवार गणगौर पूजा भी करते हैं।
100 साल पुराना है गुजराती समाज का इतिहास
कानपुर में गुजराती समाज का इतिहास करीब 100 साल पुराना है। संगठन अध्यक्ष अशोक सावला और जनरल सेक्रेटरी शरद जानी ने बताया कि करीब 100 साल पहले गुजरात सूखा और गरीबी की चपेट में था।
तभी कई गुजराती परिवार रोजगार की तलाश में कानपुर, कोलकाता, जयपुर, इंग्लैंड, रंगून, अफ्रीका और अन्य स्थानों के लिए निकले थे। कानपुर में ज्यादातर गुजराती परिवार कपड़े, मशीनरी और केमिकल कारोबार से जुड़े हैं।
गुजराती समाज के अधिकतर लोगों का व्यवसाय और निवास बिरहाना रोड, जनरलगंज, आनंदपुरी, चकेरी, तिलक नगर और आर्य नगर में है। उन्होंने बताया कि कानपुर में गुजराती समाज के लगभग 350 परिवार हैं। इनमें जैन गुजराती, ब्राह्मण, बनिया, वैश्य और ठाकुर शामिल हैं।