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रेमडेसिविर इंजेक्शन का मामला: जांच करने सीडीओ डॉक्टर महेंद्र कुमार पहुंचे हैलट

Fri, 18 Jun 2021 12:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala
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कानपुर हैलट के कोविड वार्ड में मुर्दों को इंजेक्शन लगाने के मामले में सीडीओ डॉक्टर महेंद्र कुमार शुक्रवार को जांच करने अस्पताल पहुंचे। इस प्रकरण में जीसीवीएम मेडिकल कालेज प्रबंधन ने एक और फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया है। इस संबंध में कालेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने आदेश जारी कर दिया है।
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फार्मासिस्ट निर्मल पाठक न्यूरो साइंसेस लेवल थ्री कोविड अस्पताल में तैनात रहे थे। उनका निलंबन अभिलेखों के ढंग से रख-रखाव और अपडेट न रखने के आरोप में किया गया है। रेमडेसिविर प्रकरण में न्यूरो साइंसेस की सिस्टर इंचार्ज और एक फार्मासिस्ट को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही नौ लोगों से स्पष्टीकरण तलब किया है।

न्यूरो साइंसेस के अधीक्षक और सह अधीक्षक से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस मामले की जांच अभी जा रही है। इसी के क्रम में गुरुवार को एक और फार्मासिस्ट का निलंबन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि कागजात को दुरुस्त न रखने की वजह से यह गड़बडी हुई है। फार्मासिस्ट के ऊपर दवा के वितरण की जिम्मेदारी रही है। अगर अभिलेखों को समय से ब्योरा अपडेट किया जा रहता है तो दिक्कत न होती।
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ये है पूरा मामला
कानपुर हैलट के न्यूरो साइंसेज विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। यहां कोविड वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने मुर्दों के नाम पर कई दिनों तक रेमडेसिविर इंजेक्शन स्टोर से निकलवाए गए थे। डॉक्टरों की ओर से जारी पर्चे पर ये इंजेक्शन निकाले गए थे। आशंका है कि बाजार में महंगे दामों पर नर्सिंग स्टाफ ने ये इंजेक्शन बेचे हों। जिसकी जांच जारी है।

इसका खुलासा न्यूरो साइंसेज विभाग में रिकॉर्ड के जरिये हुआ था। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सभी सरकारी अस्पतालों में रेेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई की जा रही थी। इसे कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों को डॉक्टर की अनुमति पर प्रतिदिन लगाया जा रहा था। नर्सिंग स्टाफ को ये इंजेक्शन और अन्य दवाएं डॉक्टर की परमिशन से स्टोर से मिलती थीं।

30 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की टीम ने हैलट के दो कर्मचारियों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते रंगेहाथ दबोचा था। कालाबाजारी में हैलट के वार्ड ब्वॉय का नाम सामने आने के बाद अमर उजाला ने हैलट के न्यूरो साइंसेज विभाग के जब रिकॉर्ड खंगाले तो कई चौंकाने वालेे तथ्य सामने आए थे। 
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