सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुकदमे में अपना पक्ष रखते अधिवक्ता शक्ति पांडे
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सीबीएसई के फेल छात्रों की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को ही कंपार्टमेंट परीक्षा का मामला सुलझाने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं को एक सप्ताह में सीबीएसई को एक प्रतिवेदन देने और प्रतिवेदन मिलने के एक सप्ताह में बोर्ड को मामले का निस्तारण करने को कहा है।
कोरोना महामारी के दौरान कंपार्टमेंट परीक्षा देने से छात्रों को जान का जोखिम उठाना होगा, अगर परीक्षाएं आगे बढ़ाई जाती हैं तो छात्रों का एक साल बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में या तो परीक्षाएं रद्द कर दी जाएं या छात्रों को फिलहाल प्रोविजनली पास कर दिया जाए ताकि छात्र आगे की परीक्षा की तैयारी कर सकें। इस तर्क के आधार पर आरएस पुरम निवासी अधिवक्ता शक्ति पांडे ने अनिका सामवेदी समेत सात अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।
अधिवक्ता शक्ति पांडे ने बताया कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों की संख्या लगभग 2.10 लाख है। महामारी के चलते ये छात्र पास होने के विकल्प का फायदा नहीं उठा पाएंगे जिससे इनके आगे की पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा। इसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने याचिका दाखिल की थी जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। महामारी के चलते वह कानपुर में हैं, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उन्होंने घर से ही मुकदमे में अपना पक्ष रखा।
यह होती है कंपार्टमेंट परीक्षा
अगर किसी विषय में छात्र के नंबर कम हैं या वह फेल हो गया है तो परिणाम आने के कुछ दिनों बाद तक वह कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। एक निश्चित शुल्क जमा करना होता है। इस परीक्षा में आवेदन करने के बाद छात्र आगे की पढ़ाई के लिए अप्लाई कर सकता है। हालांकि अगर कंपार्टमेंट परीक्षा में भी छात्र फेल हो जाता है तो आगे की पढ़ाई के लिए किया गया आवेदन निरस्त हो जाएगा।