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सीबीएसई बंद करेगा कई विषय, आपके लिए जरूरी जानकारी, जरूर पढ़ें

Thu, 11 Apr 2019 10:36 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फाइल फोटो
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अपने कई विषय बंद करने की तैयारी में हैं। कई ऐसे वैकल्पिक विषय हैं, जिनमें छात्र बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। पिछले कुछ सालों में न के बराबर छात्रों का इन विषयों का चयन किया है।
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बोर्ड ने स्कूलों से सुझाव मांगे हैं। जल्द ही इन विषयों की समीक्षा की जाएगी। बोर्ड को लगता है कि इन विषयों को चलाने का कोई फायदा नहीं तो बंद कर दिए जाएंगे। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि 10वीं और 12वीं में कुछ वोकेशनल सब्जेक्ट ऐसे हैं, जिनमें बहुत ही कम छात्रों का पंजीकरण है।

उदाहरण के तौर पर 12वीं में थिएटर स्टडीज और ह्यूमन राइट्स एंड जेंडर स्टडीज में इस बार पूरे देश से केवल एक छात्र पंजीकृत था। दोनों ही इलेक्टिव (वैकल्पिक) सब्जेक्ट हैं। इन विषयों को चुनने के लिए स्कूल की तरफ से छात्रों को विकल्प दिया जाता है।

हर स्कूल को ये सब्जेक्ट चलाना जरूरी भी नहीं है। इस बार बोर्ड ने 12वीं के लिए 55 वैकल्पिक विषयों पर एग्जाम करवाए थे। ज्यादातर विषयों में छात्रों की संख्या बेहद कम रही है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इन विषयों की समीक्षा की जा रही है।

इन विषयों पर चल सकती है कैंची 
- थिएटर स्टडीज 
- ह्यूमन राइट्स एंड जेंडर स्टडीज 
- लाइब्रेरी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर साइंस
- हेल्थ सेंटर मैनेजमेंट
- कर्नाटक म्यूजिक
- मोहिनीअट्टम डांस 
- एग्रीकल्चर
- फूड प्रोडक्शन
- टूरिज्म 
- रिटेल आदि
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छात्र चाहे एक हो पर तैयारी उतनी ही
सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर बलविंदर सिंह का कहना है छात्रों की संख्या एक हो या एक हजार, उसके लिए पूरा सिस्टम एक जैसा ही काम करता है। प्रश्न पत्र बनाने से लेकर टीचर्स ट्रेनिंग, इवैल्यूशन प्रक्रिया सभी के लिए बोर्ड को काम करना पड़ता है। स्कूल भी इन विषयोें को चलाने की दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इतने कम स्टूडेंट के लिए प्रबंधन टीचर व बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खर्च नहीं करना चाहते।

स्कूल भी नहीं चाहते, छात्रों को जानकारी नहीं
बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि ये विषय बेहद अच्छे और मार्किंग वाले हैं। अगर छात्रों को सही तरह से इसकी जानकारी स्कूलों में दी जाए और स्कूल इन विषयों का संचालन करें तो इनके बंद करने की नौबत नहीं आएगी। बताया जाता है कि स्कूल खुद नहीं चाहते कि परंपरागत विषयों के अलावा कोई और विषय चलाए जाएं। इससे उनका खर्चा बढ़ता है।
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