हमीरपुर में खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को मौदहा बांध के निरीक्षण भवन में खनिज और वन विभाग के अभिलेखों की पड़ताल की। सीबीआई ने अब बसपा और सपा सरकार में तैनात रहे आईएएस, पीसीएस व वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समेत तमाम कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों से यह संकेत मिले हैं।
सीबीआई ने मुख्यालय स्थित मौदहा बांध के निरीक्षण भवन में अवैध खनन की 12 दिनों तक जांच की। वर्ष 2009 से लेकर 2012 और 2012 से 2016 तक हाईकोर्ट से रोक के बावजूद जारी किए गए मौरंग खनन के पट्टों को लेकर सीबीआई ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए वन विभाग तक पहुंच गई। बेंदा दरिया, रिरुआ, घुरौली व शिवनी समेत कई मौरंग खनन के पट्टों में दी गई।
आईएएस बी. चंद्रकला
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पर्यावरण संबंधी एनओसी पर सीबीआई ने सवाल उठाते हुए तत्कालीन डीएफओ ललित किशोर गिरि, रिटायर्ड रेंजर एके मिश्रा, वन दरोगा, एसडीओ, प्रशासनिक अधिकारी वन विभाग समेत नौ कर्मचारियों को तलब कर बयान लिए हैं। ललित किशोर गिरि इस समय कानपुर देहात के डीएफओ है, जिन्हें दो बार बुलाकर जारी की गई एनओसी पर सवाल कर जवाब लिए।
याचिकाकर्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी एडवोकेट ने बताया कि सीबीआई ने सरीला तहसील तहसील के अंतर्गत वन क्षेत्र में मौरंग खनन के पट्टों में पर्यावरण संबंधी एनओसी में भारी गड़बड़ी पकड़ी है। बेंदा दरिया, शिवनी सहित कई मौरंग के पट्टे कारोबारियों ने लेकर वन क्षेत्र को ही मशीनों से खोद डाला है। जिसके साक्ष्य किसानों के बयानों और जांच में सीबीआई के हाथ लगे हैं।
अवैध मौरंग खनन में आईएएस बी चंद्रकला का फिर उछला नाम
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उन्होंने बताया कि सीबीआई ने मायावती सरकार के कार्यकाल में तैनात रहे जिले में आईएएस, पीसीएस और वन विभाग के छोटे बड़े अधिकारियों समेत तमाम कर्मचारियों के अलावा कई मौरंग कारोबारियों के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज करेगी। साथ ही शासन स्तर पर बैठे खनिज विभाग के बड़े अधिकारियों को भी इसमें शामिल करेगी।
याचिकाकर्ता ने बताया कि वर्ष 2009 से 2016 तक सभी मौरंग खनन के पट्टों के अभिलेखों और उनमें जारी एनओसी की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तत्कालीन खनिज मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और गायत्री प्रजापति भी सीबीआई के रडार में कैद हो गए हैं। इन लोगों पर भी सीबीआई एक्शन लेगी।