फतेहपुर में सपा शासन काल में मानकों को ताक पर रखकर मौरंग खदान पट्टों के आवंटन मामले में चौथे दिन सीबीआई लखनऊ रवाना हो गई। हालांकि जांच एजेंसी ने गुरुवार को किसी से कोई पूछताछ नहीं की। अब वह लखनऊ कार्यालय में पट्टे आवंटन में शामिल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों का बंद लिफाफा देगी।
सूत्रों की मानें तो रायबरेली खनन अधिकारी पर शिकंजा कुछ कस सकता है। सीबीआई की रिपोर्ट पर डीएम अभय के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं, ऐसे में उन्हीं के समय खनन अधिकारी रहे सुरेंद्र सिंह पर तलवार लटकी हुई है। दिल्ली सीबीआई के विवेचक सुनील कुमार सिंह टीम के साथ सोमवार को जांच करने आए थे।
रायबरेली खनन अधिकारी के खिलाफ दे सकती है रिपोर्ट
अवैध मौरंग खनन
मौरंग खदानों के मानक दरकिनार कर 2012 से 2014 के बीच पट्टे किए गए थे। पट्टों की 2017 से जांच शुरू हुई है। खनन पट्टे किए जाने का तत्कालीन डीएम अभय सिंह पर आरोप लगा है। सीबीआई टीम ने तत्कालीन खनन अधिकारी सुरेंद्र सिंह से बुधवार को लंबी पूछताछ की थी। टीम तमाम दस्तावेज साथ ले गई है।
तत्कालीन एडीएम, एसडीएम, खनन विभाग के बाबूओं समेत कई अधिकारियों की सूची तैयार की गई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट देने के बाद तत्कालीन कर्मचारियों से भी पूछताछ के लिए बुलावा भेजा जा सकता है। सीबीआई टीम ने फिर से जल्द पूछताछ को आने के संकेत दिए हैं। यह पूछताछ भी काफी अहम मानी जा रही है। इस पूछताछ के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकता है।
पूर्व ब्लाक प्रमुख का भट्ठा ढहाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व ब्लाक प्रमुख इंद्रसेन यादव के भट्ठे के वाद का निस्तारण हो गया है। कोर्ट के आदेश पर एनजीटी ने जिला प्रशासन को भट्ठा का ढांचा चिमनी और चैंबर ध्वस्त करने के आदेश को बरकरार रखा है। डीएम संजीय सिंह ने आदेश का एसडीएम, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज, खनन अधिकारी, सर्किल सीओ को आदेश दिए है। टीम जल्द ही पूर्व ब्लाक प्रमुख के गांव रामपुर इमादपुर में संचालित भट्ठे को ध्वस्त करने जाएगी।