अन्ना जनवरों को एक जिले की सीमा से दूसरे जिले की सीमा में खदेड़ा जा रहा है
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यूपी-एमपी की सीमा पर अन्ना पशुओं की हालत घुसपैठियों जैसी हो गई है। सीमावर्ती किसान इन्हें आए दिन एक-दूसरे की सरहदों में खदेड़ रहे हैं। कुछ ही दिन पूर्व अन्ना गायों के बड़े हुजूम को यूपी (बांदा) के किसानों ने एमपी के गांवों में खदेड़ दिया था। अन्ना गायों ने वहां कहर ढाया तो एमपी के किसानों ने फिर यूपी के गांवों में खदेड़ दिया है। अब यहां बड़ी संख्या में अन्ना गायें घूम रही हैं।
सीमावर्ती गांवों में अन्ना गायों की भरमार है। गो आश्रय केंद्र जैसी व्यवस्थाएं यहां फ्लाप हैं। बुधवार को सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की घाटी से बड़ी संख्या में अन्ना गायों को वहां के ग्रामीणों ने महाराजपुर (यूपी) चौकी के रास्ते से बांदा की सीमा में खदेड़ दिया है। इन गायों का झुंड करतल की ओर बढ़ रहा है।
बुवाई होने के बाद सीमा पर बढ़ी किसानों की चौकसी
यूपी के किसान इन्हें रोक रहे हैं। करतल सहित बांदा जिले के बिल्हरका, नहरी, पुंगरी, पुकारी, खलारी, कनाय, महाराजपुर, रगौली और अकेलवा आदि गांवों में अन्ना गायें फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती रहती हैं। इन्हीं गांवों के किसानों ने कुछ दिन पूर्व इन गायों को पन्ना (एमपी) में खदेड़ दिया था। बुवाई के बाद किसानों ने फसलें बचाने के लिए अन्ना गायों को यहां दाखिल होने से रोकने की नाकाबंदी शुरू कर दी है। करतल न्याय पंचायत में गोशाला बंद पड़ी है।
सीमावर्ती किसानों में टकराव के हालात
अन्ना पशु सीमावर्ती किसानों के आपसी रिश्तों में भी रोड़ा बन रहे हैं। इन्हें लेकर दोनों सूबों के किसानों में टकराव की नौबत आ सकती है। ऐसी कुछ घटनाएं हो भी चुकी हैं। पिछले हफ्ते एमपी के रामनई गांव से वहां के किसान अन्ना गायों का झुंड लेकर नहरी (बांदा, यूपी) की तरफ लेकर बढ़ रहे थे। भनक लगते ही नहरी, पुंगरी, बिल्हरका आदि गांवों के किसान आ गए और मोर्चा संभाल लिया।
एक-दूसरे की सीमा पर किसान खदेड़ रहे गायों को
तनातनी की स्थिति पैदा हो गई। दोनों तरफ के गांवों के प्रधानों ने समझा-बुझाकर शांत कराया। इसी तरह पिछले वर्ष जुलाई में यूपी के शेखनपुर, मानपुर, पुकारी और खलारी गांवों के किसान अन्ना पशुओं का झुंड हांककर एमपी की तरफ जा रहे थे तभी वहां के देवगांव, अजयगढ़ और बीरा के किसान विरोध में सामने आ गए थे और खासा विवाद हुआ था। ब्यूरो
किसानों के लिए काल बनी हैं अन्ना गायें
बिल्हरका (बांदा) के किसान महेश पाल, महाराजपुर के नत्थू अहिरवार और पुंगरी के रामऔतार ने बताया कि अन्ना गाय उनकी खेती के लिए काल बन रही हैं। तीनों किसानों की लगभग 35 बीघा जमीन में बोई मूंग और तिली की फसल सफाचट कर दी। पिछले साल महाराजपुर के किसान नत्थू की 6 बीघा फसल अन्ना गायों का भोजन बन गई। किसान महेश को दिल्ली जाकर मजदूरी करना पड़ी। कमोवेश यही हाल बिल्हरका के महेश पाल, खलारी के जयनारायण पटेल आदि ने भी बताया।