उनके मोबाइल से अहम साक्ष्य मिले हैं। जिन्हें पुलिस ने जांच में शामिल कर कोर्ट में पेश किया है। भड़काऊ कंटेंट के अलावा व्हाट्सएप से बड़ा ख़ुलासा हुआ है। आरोपी शहर के अलावा दूसरे शहरों की युवतियों से जुड़े हुए थे। उन सभी से लगभग एक ही जैसी बातें कर रहे थे। सभी को आरोपियों ने अपना दूसरा नाम बता रखा था। पुलिस ने चैट को रिकवर भी कराया है।
संपर्क में थे एक संगठन के लोग
एसआईटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों ने किसी संगठन के इशारे पर जबरन धर्म परिवर्तन की साजिश नहीं रची। मगर जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एक पाकिस्तान के संगठन का नाम सामने आया है, जो शहर में पांव पसार रहा है। तमाम लोग संगठन के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं। ये सभी धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक जेल भेजे गए कुछ आरोपी इन लोगों के संपर्क में थे।
फिलहाल एसआईटी की जांच में किसी संगठन या फंडिंग के साक्ष्य नहीं मिले हैं। अगर कोई नए तथ्य सामने आएंगे तो उसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मोहित अग्रवाल, आईजी