कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और कार्डियोलॉजी संस्थान प्रशासन कर्मचारी आवास तोड़ने, डेढ़ सौ वर्ष पुराने बरगद को काटने और जमीन के स्वामित्व को लेकर आमने सामने आ गए हैं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रो. संजय काला ने आवास विकास के ठेकेदार के खिलाफ स्वरूपनगर थाने में तहरीर दी है। वहीं कार्डियोलॉजी के निदेशक ने दावा किया है कि जगह उनके संस्थान की है। सारे कार्य नियमों के अनुसार हुए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रो. संजय काला की तरफ से स्वरूपनगर थाने को दी गई तहरीर के अनुसार मेडिकल कॉलेज कैंपस में सी-15, सी-16, सी-17 और सी-18 आवास बने थे। उन्हें आवास विकास के ठेकेदार ने बिना पूर्व सूचना के ध्वस्त कर दिया। उनसे न ही अनुमति ली गई और न ही किसी प्रकार की जानकारी दी गई। उन्होंने चार जून को मेडिकल कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया, जिसमें उन्हें सीमेंटेड सड़क बनी मिली। यह सड़क तोड़े गए आवास की पुरानी ईंटों से बनी है। उनकी जमीन पर ठेकेदार ने मजदूरों के अस्थायी आवास बनाए हैं, जिससे जलभराव, सीवर जाम और गंदगी की समस्या है। नजदीक में छात्रावास हैं, जिससे छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज की सीवर लाइन से बिना अनुमति नई सीवर लाइन जोड़ी गई है। करीब 150 वर्ष पुराने संरक्षित बरगद के पेड़ को काट दिया गया। प्राचार्य ने तहरीर की कापी मुख्यमंत्री के निजी सचिव, उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निजी सचिव, अपर मुख्य सचिव, मंडलायुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक, पुलिस कमिश्नर, डीएम को भेजी है।
जहां आवास गिराए गए हैं, वह कॉडियोलॉजी की जमीन है। भवन निर्माण के दौरान फायर एनओसी के लिए न्यूनतम तीन मीटर जमीन चाहिए, इसलिए खंडहर गिराकर सड़क चौड़ी की गई है। ये क्वार्टर और पेड़ अनुमति लेकर हटाए गए हैं। कार्डियोलॉजी की जमीन है तो इन्हें गिराने की सूचना मेडिकल कॉलेज को क्यों देनी चाहिए? मेडिकल कॉलेज प्राचार्य यदि कॉलेज का भूस्वामित्व दिखा देंगे, उसी दिन वह जगह छोड़ देंगे।
-डॉ. राकेश वर्मा, निदेशक, कॉडियोलॉजी