फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जिला जेल में तैनात बंदी रक्षक का शव बुधवार सुबह जेल से सटे विभागीय क्वार्टर में फंदे से लटकता मिला। शर्ट से मिले पत्र को सुसाइड नोट मानते हुए पुलिस और जेल प्रशासन मामले को खुदकुशी मान रहा था लेकिन दोपहर में मृतक की पत्नी ने हत्या का शक जताते हुए कुछ सूदखोरों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया तो मामला हत्या और खुदकुशी के बीच उलझ गया।
घटना के केंद्र में हैं हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र के गांव राजनगर कलां के मूल निवासी 49 वर्षीय रीतिराम सिंह। फतेहगढ़ जेल में बंदी रक्षक के पद पर तैनात रीतिराम के साथियों के मुताबिक मंगलवार रात करीब 9:30 बजे रीतिराम ने झांसी निवासी बंदी रक्षक अभिषेक के साथ सामान्य ढंग से खाना खाया था। इसके बाद अभिषेक रात 12 से चार बजे की ड्यूटी करने चले गए।
शव छत के कुंडे में मफलर से बने फंदे पर लटका नजर आया
पड़ोसी आवास में रहने वाले बंदी रक्षक महेश सिंह बुधवार भोर में चार से सुबह आठ बजे की ड्यूटी के बाद 8:30 बजे घर पहुंचे तो रीतिराम के आवास का दरवाजा खुला देख आवाज दी। जवाब न मिलने पर भीतर गए तो किचन में रीतिराम का शव छत के कुंडे में मफलर से बने फंदे पर लटका नजर आया। दोनों पैर फर्श पर और घुटने मुड़े थे। पास में ही चप्पले भी थीं।
सूचना पर जेलर जीएस यादव, फतेहगढ़ कोतवाली के दरोगा नरेंद्र सिंह पहुंचे। शव उतारते वक्त जेब में कागज दिखा। जांच करने पर उसकी शैली सुसाइड नोट जैसी लगी। कागज पर खुद को मौत का जिम्मेदार बताते हुए किसी को जिम्मेदार न ठहराने की बात लिखी थी। अंत में नाम के नीचे तारीख डालते समय सन 2018 लिखी गई थी।
पुत्र अजीत ने कहा कि पिता आत्महत्या नहीं कर सकते
पुलिस ने इस पत्र के आधार पर खुदकुशी का मामला बताया। वर्तमान समय में मथुरा के मिर्जापुर क्षेत्र की शाकुंज कालोनी में रह रहे मृतक के घर वालों ने घटना को हत्या बताया है। रीतिराम के पुत्र अजीत ने कहा कि पिता आत्महत्या नहीं कर सकते। पत्नी संगीता ने भी यही बात दोहराते हुए हत्या का मामला बताया। जेल के इर्दगिर्द रहकर सूदखोरी का काम करने वाले तीन लोगों को शक के दायरे में लेते हुए अफसरों तक जानकारी पहुंचाने की बात कही।
पति ने 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर कुछ रुपये उधार लिए थे। सूदखोर तकाजा करने के नाम पर उत्पीड़न करते थे और ड्यूटी भी नहीं करने देते थे। पत्नी का कहना है कि रीतिराम ने बुधवार सुबह सात बजे उनसे फोन पर बात भी की थी। आठ बजे फिर फोन किया तो कॉल रिसीव नहीं हुई। दूसरी ओर जेल सूत्रों का कहना है कि बंदी रक्षक रीतिराम चार माह से अनुपस्थित थे। मंगलवार को ही ड्यूटी पर लौटे थे। कोतवाल का कहना है कि परिवार की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।