उनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं मिल रहा
नोट बंदी को लेकर लगातार सख्त होते हुए नियम से कुछ राजनीतिक दलों के विधानसभा चुनाव प्रत्याशी काफी खुश हैं। चर्चा है कि नोट बंदी से ठीक पहले तक कई विधानसभा सीटों पर टिकट पाने की होड़ लगी रहती थी। लेकिन इस नए नियम के आने के बाद टिकट का मसला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चला गया है।
कहा जा रहा है कि टिकट पाने के लिए की जाने वाली भागदौड़ में काफी खर्च हो जाता है। नोट बंदी की वजह से यह खर्च कर पाना चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों को भारी पड़ रहा है। इसी वजह से फिलहाल टिकट को लेकर आपाधापी करने का सिलसिला धम सा गया है। पिछले दिनों एक पार्टी के नेताओं को अपने केंद्रीय कार्यालय सूटकेस के साथ बुलाया गया था। निर्देश दिया गया था कि वे पुरानी करेंसी को नई में बदलवाने का काम करें। पता चला है कि जिन लोगों ने अभी तक ऐसा कर लिया है, उनकी रेटिंग जरूरी बढ़ी है, लेकिन जो नहीं कर पाए हैं, वे भी खुश है। इसकी वजह यही है कि उनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं मिल रहा है।