कानपुर में नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यशाला में निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने कहा कि चीनी मिलें गन्ने की खोई (बगास) का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के रूप में कर सकते हैं। इसके बाद भी देशभर में 50 लाख मीट्रिक टन बगास बच जाएगी।
इससे चीनी मिलें पार्टिकल बोर्ड पैनल बनाकर अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। बोर्ड पैनल का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने में किया जाता है। गुरुवार को इंस्टीट्यूट के सभागार में हुई कार्यशाला में प्रो. नरेंद्र ने बताया कि बिजली उत्पादन के अलावा बगास से पार्टिकल बोर्ड पैनल के निर्माण का सफल प्रयास किया गया।
इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डी. स्वेन ने बताया कि फर्नीचर उद्योग में वुड पैनल के बढ़ते उपयोग ने नए पदार्थों की मांग बढ़ा दी है। बगास के बोर्ड पैनल के इस्तेमाल से लकड़ी की खपत घटेगी और पेड़ों की कटान कम होगी। इस मौके पर चीन और ब्राजील में बगास के पार्टिकल बोर्ड पैनल के इस्तेमाल के संबंध में प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में विभिन्न निजी कंपनियों के अधिकारी रहे।