उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। बसपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची फाइनल कर दी है। सपा में मचा घमासान से पार्टी के नेताओं में असमंजस की स्थिति कायम है। वहीं भाजपा और कांग्रेस अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि राजनीति से अपराधियों को अलग-थलग करने का दावा करने वाली भाजपा खुद दागी चेहरों पर ही दांव खेलने का मन बना रही है। हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं ने लिखित तौर पर राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व को ऐसे लोगों को टिकट न देने की मांग की है।
टिकट के दौड़ में दागियों के परिजन
बीजेपी
पार्टी के प्रदेश संगठन में आपराधिक इतिहास वालों का दबदबा कायम है। ऐसे में उम्मीदवारों की सूची में भी इस तरह के कई चेहरे शामिल होने कि कोशिशों में जुटे हैं। इलाहाबाद की मेजा सीट इन दिनों चर्चा का विषय है। विधायक जवाहर पंडित कि हत्या के आरोप में जेल में बंद भाजपा के पूर्व विधायक सूरजभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें टिकट न दिए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन को पत्र भेजा है।
चुनाव से पहले शामिल हो गए ये दागी नेता
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इसी तरह कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए बस्ती के विधायक संजय जायसवाल को भी टिकट दिए जाने की चर्चा है। संजय के खिलाफ दो गंभीर मामलों में मुकदमें चल रहे हैं, जिनमें 7 क्रिमिनल एक्ट और हथियारों के साथ बलवा करने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। कुशीनगर से कांग्रेस विधायक विजय दुबे को भी पार्टी में शामिल किए जाने से सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। विजय के खिलाफ भी 7 क्रिमिनल एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इसके अलावा बसपा से भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ खुद धार्मिक भावनाएं भड़काने समेत कई मामले चल रहे हैं।