कनपुरिया छात्रों को भी मिलेगा सौर सभा में मौका
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर विश्व भर में मनाई जाने वाली विद्यार्थी सौर सभा (स्टूडेंट सोलर असेंबली) में कानपुर से भी बड़ी संख्या में आईआईटी कानपुर और विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी शामिल होंगे। आईआईटी कानपुर के छात्र-छात्राएं कानपुर के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करने के साथ ही सभा में शामिल होने के लिए प्रेरित करेंगे।
गुरुवार को देश के सौर पुरुष (सोलर मैन) के रूप में विख्यात आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी से आईआईटी के छात्रों को इस अभियान का एंबेसडर बनाया। उन्होंने आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर से भी मुलाकात की।
विश्व भर में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईआईटी बॉम्बे में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सोलंकी ने 25 दिसंबर 2018 को साबरमती आश्रम से गांधी ग्लोबल सोलर यात्रा (जीजीएसवाई) शुरू की। इसके अंतर्गत सोलंकी ने विश्व के 30 देशों की यात्रा कर लोगों को सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया है।
इस वर्ष पांच जुलाई को मुंबई से उन्होंने देश में सोलर यात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा देश के 50 शहरों से होकर नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में दो अक्तूबर को खत्म होगी। यहां होने वाली सौर सभा में हजारों की संख्या में विद्यार्थी खुद से बनाए गए सोलर लैंप को रोशन करेंगे। सौर सभा का आयोजन पूरे विश्व में होगा।
इसी कड़ी में बुधवार को यात्रा आईआईटी कानपुर पहुंची। यहां प्रोफेसर सोलंकी ने आईआईटी के साथ ही विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों से संवाद किया और किस तरह से सोलर लैंप की सभा होनी है, उसके बारे में भी बताया।
इस दौरान प्रोफेसर सोलंकी ने बताया कि इस अभियान से करीब 30 लाख विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। अब तक करीब 10 लाख किशोर व विद्यार्थी इस वैश्विक आयोजन में भाग लेने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। सोलंकी ने कहा कि एनर्जी स्वराज लाने का समय आ गया है।
यह वह स्वराज है, जिसमें लोग खुद उत्पादन कर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं। दो अक्तूबर को होने वाली सौर सभा के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक तरीके से बिजली का उत्पादन करने में जलवायु में प्रतिकूल प्रभाव आ रहा है।
पेड़ों की कटान, कोयला के जलने से दुनिया का तापमान पहले ही लगभग एक डिग्री तक बढ़ गया है। ऐसे में आज से 50 साल बाद सौर ऊर्जा का महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। बच्चे और युवा ही इस स्थिति का सामना करेंगे, इसलिए उन्हें जागरुक किया जा रहा है।
दो अक्तूबर के कार्यक्रम में भाग लेने के इच्छुक विद्यार्थी https://www.ggsy.in/collaborate.php पर स्वयं को रजिस्टर कर सकते हैं ।