आईआईटी से बीटेक की डिग्री लेने और जॉब छोड़ने के बाद अध्यात्म का चोला ओढ़ने वाले आईआईटियंस ने रविवार को आध्यात्मिक प्रवचन दिया। जीवन के मूल्य और चरित्र निर्माण की जानकारी देते हुए कहा कि जिस शब्द का मायने मैथ, साइंस की किताबों, इंटरनेट पर ढूंढे नहीं मिला, वह श्रीमद भागवत गीता के श्लोकों में मिल गया।
यानी पढ़ाई के साथ अध्यात्म की जानकारी जरूरी है। यह संतुलित जीवन शैली की आधारशिला रखता है। पूर्व छात्रों से संबंधित काम देखने वाले प्रो. कृपाशंकर ने कहा कि अाध्यात्मिक प्रवचन ने अंतर मन को झकझोरा है।
आईआईटी से बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1991 में निर्मल पंत ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। बेस्ट परफारमर भी बने लेकिन संतुष्टि नहीं मिली।
इसके बाद श्रीमद भागवत गीता का अध्ययन किया और अध्यात्म से जुड़ गए। निर्मल पंत से संत नामा निष्ठादास बन गए और प्रवचन देने लगे। वह आईआईटी के पूर्व छात्र सम्मेलन मेें हिस्सा लेने पहुंचे और रविवार को प्रवचन भी दिया। नामा निष्ठादास इस वक्त मंगलौर स्थित इस्कान के प्रमुख हैं।
प्रो. महान मित्रा ने आईआईटी से मैथमेटिक्स की डिग्री ली। अब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मुंबई में प्रोफेसर हैं। शांति स्वरूप भटनागर सहित तमाम अवार्ड मिल भी चुके हैं।
उनके ज्ञान का लोहा माना जाता है, फिर भी वह अध्यात्म से जुड़े और रविवार को प्रवचन भी दिया। वेल्लोर के रामकृष्ण मिशन से जुड़े प्रो. महान का कहना है कि वेदांतिक दर्शन में ही जीवन का सार है। मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले तनुज नारायण भी अध्यात्म की शरण में जा पहुंचे हैं।