नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) कानपुर में रह रहे पाकिस्तान के सात सिंधी परिवारों के लिए खुशियां लेकर आया है। 80-90 के दशक में आए इन परिवारों के 25 से 30 लोगों ने नए कानून के तहत भारत की नागरिकता मांगी है।
उम्मीद है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें यहां की नागरिकता मिल जाएगी। इससे इन्हें हर तीन साल में वीजा अवधि बढ़वाने की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।
नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद प्रदेश सरकार ने भी सूबे के प्रत्येक शहर में रहने वाले शरणार्थियों की जानकारी जुटाई है। प्रदेश में करीब 32 हजार शरणार्थियों के होने की पुष्टि हुई है। एलआईयू (लोकल इंटेलीजेंस यूनिट) के मुताबिक कानपुर में सात शरणार्थी परिवार करीब चार दशक से रह रहे हैं।
ये सभी सिंधी हैं और पाकिस्तान से आकर यहां रह रहे हैं। एलआईयू के मुताबिक इन सभी ने नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया है। इन्हें नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
ऐसे पहुंचे कानपुर
एलआईयू के मुताबिक इन सात परिवारों के रिश्तेदार पहले से ही कानपुर में रह रहे थे। जब पाकिस्तान में इनका रहना मुश्किल हुआ तो पासपोर्ट व वीजा बनवाकर यहां आ गए। इसके बाद ये लोग लौटे नहीं। इन्हें हर तीन साल मेें वीजा की अवधि बढ़वानी पड़ती थी।
गोपनीय रखे गए हैं इनके नाम
पुलिस और प्रशासन के पास इन सात परिवारों का विवरण उपलब्ध है। इसमें दो परिवार बर्रा, दो नौबस्ता में रहते हैं। तीन परिवार काकादेव के शस्त्रीनगर में रहते हैं। इनके बच्चे पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं और बड़े नौकरी या व्यापार में लगे हैं। पुलिस, एलआईयू व प्रशासन ने इन सभी के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। एलआईयू के एक अधिकारी ने बताया कि नागरिकता कानून लागू होने के बाद से ये सभी बेहद खुश हैं।
शहर में नहीं हैं ये शरणार्थी
एलआईयू ने पहले से ही पूरा डाटा जुटाया था। वहीं कानून लागू होने के बाद शासन के आदेश पर एक बार फिर पूरे शहर में शरणार्थियों का सत्यापन किया। इसमें सात सिंधी परिवारों को छोड़ दें तो बौद्घ, पारसी, जैन व हिंदू शरणार्थी नहीं मिले हैं।
शहर में सात सिंधी शरणार्थी परिवार रह रहे हैं। ये सभी पाकिस्तान से आए हैं। सभी ने नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया है।
- अनुपम सिंह, इंस्पेक्टर एलआईयू