कानपुर। कोरोना महामारी के दौरान देश के दवा बाजार को जब मेडिकल उपकरणों और दवाओं की ज्यादा जरूरत पड़ी तो चीन ने इस मजबूरी का फायदा उठाकर कीमतों में 10 से 15 फीसदी का इजाफा कर दिया था। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। फरवरी से लेकर अब तक चीन से आने वाले मेडिकल उपकरण खासकर ब्लडप्रेशर मशीन, ब्लडशुगर मशीन, ईसीजी मशीन, थर्मामीटर, डिजिटल थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर और तमाम सारी आपरेशन किट की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है।
दवा कारोबारियों का कहना है कि जरूरत के समय चीन की कंपनियों ने कारोबारी करार को दरकिनार कर मुनाफा कमाने पर जोर दिया। नतीजा ये रहा कि 100 रुपये का उत्पाद अब 120 रुपये का मिल रहा है। चूंकि कोरोना महामारी की वजह से उपकरणों की बहुत अधिक जरूरत पड़ी। 10 से 20 फीसदी कीमतें बढ़ाकर चीनी कंपनियों ने बहुत मुनाफा कमाया है।
मिथाइल अल्कोहल और पैरासीटामॉल के दाम भी चढ़े : थोक दवा व्यापार एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र सैनी बताते हैं कि बीते दो महीने में पैरासीटामॉल की कीमत में भी 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। चीन से आने वाला पैरासीटामॉल सस्ता पड़ता था। इस वजह से इसकी खपत ज्यादा थी। इसी तरह सैनिटाइजर बनाने में इस्तेमाल होने वाले मिथाइल अल्कोहल की कीमत में लगभग दोगुने का अंतर आ गया है। पहले मिथाइल अल्कोहल 70 से 80 रुपये लीटर मिलता था। अब यह बाजार में 120 से 140 रुपये लीटर मिल रहा है। आपूर्तिकर्ताओं ने बताया कि चीनी कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं।
सीमा विवाद के बाद भी बढ़ाए दाम : मेडिकल उत्पादों के आयातक राजेंद्र सैनी बताते हैं कि सीमा विवाद के बाद चीन ने दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के दाम 15 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। कंपनियां अब बढ़े हुए दामों पर बुकिंग कर रही हैं। चूंकि जिस चीज पर निर्भरता है उसे तत्काल बंद नहीं किया जा सकता। चीन अब इसी मजबूरी का फायदा उठा रहा है। बताते हैं कि मध्यप्रदेश में इंदौर और पीथमपुर की कंपनियों ने हाल ही एजीथ्रोमाइसिन का कच्चा माल 11 हजार रुपये किलो में बुक किया है। एक महीना पहले इसकी कीमत सात हजार रुपये किलो थी। संजय बताते हैं कि दवाओं में इस्तेमाल होने वाला 65 फीसदी कच्चा माल चीन से आता है।