कन्नौज बस हादसे के मामले की जांच कर रहे उपायुक्त कानपुर व आगरा ने अपनी जांच रिपोर्ट परिवहन आयुक्त लखनऊ व प्रमुख सचिव को भेज दी है। रिपोर्ट के आधार पर सामान्य बसों को स्लीपर में बदलने की अनुमति देने के मामले में तीन अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
फाइलों से कुछ अहम दस्तावेज गायब होने से एक लिपिक पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। परिवहन उपायुक्त आगरा और उपायुक्त कानपुर देवेंद्र त्रिपाठी ने जांच रिपोर्ट में सामान्य बस को स्लीपर में बदलने की अनुमति देने में वर्ष 2016 व 2018 में कानपुर से फर्रुखाबाद एआरटीओ कार्यालय भेजे गए पीटीओ कन्हैया प्रसाद गुप्ता (वर्तमान में एआरटीओ नोएडा) कानपुर के आरआई जय सिंह, कन्नौज के तत्कालीन पीटीओ आरएस वर्मा (वर्तमान में सेवानिवृत्त) को दोषी माना है।
हालांकि इन अधिकारियों ने फाइलों पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया है। फाइल से बस की बॉडी बनाने वाली अधिकृत संस्था का जारी किया हुआ 22 टू-ए-टू फार्म सहित कई अहम प्रपत्र गायब मिले हैं। इस पर 2016 में लिपिक विनोद कुमार (वर्तमान में जिला फतेहपुर में तैनात) पर भी कार्रवाई हो सकती है।
उस दौरान लिपिक के कोड से ही फिटनेस की फाइलों में अधिकारी अनुमति दे देते थे। उधर, कन्नौज में एडीएम की जांच में विमल बस सर्विस सहित इस तरह की बसों के संचालन में परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ ही गुरसहायगंज और छिबरामऊ कोतवाली पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। टूरिस्ट परमिट पर बस लंबे समय से गुरसहायगंज और छिबरामऊ में फिक्स प्वाइंट से सवारियों को बैठा और उतार रही थीं। टूरिस्ट परमिट पर ऐसा करना नियमों के विपरीत है।