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Kanpur News: सात साल से धूल फांक रही बर्न यूनिट का खुला ताला, सफाई शुरू

Fri, 23 Oct 2026 01:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज अकबरपुर से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में वर्षों से बंद पड़ी प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट के संचालन की कवायद तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को यूनिट का ताला खुला। इसके बाद अंदर रखे बेड और उपकरणों की सफाई शुरू कराई गई है। खिड़की, दरवाजों के साथ ही पूरे परिसर की साफ-सफाई कराई जा रही है। लंबे समय से उपेक्षित पड़े भवन में गतिविधियां शुरू होने से इसके जल्द संचालन की उम्मीद जगी है।
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जिला अस्पताल परिसर में बनी इस यूनिट का भवन डॉक्टरों, विशेषज्ञों और जरूरी उपकरणों की कमी के चलते वर्षों से इस्तेमाल में नहीं आ सका है। निर्माण पूरा होने के बाद भी इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाया। अब साफ-सफाई शुरू होने के साथ ही यूनिट को चालू करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट के निर्माण को नवंबर 2012 में मंजूरी मिली थी। इसके लिए करीब 1.96 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई थी।
वर्ष 2017-18 में भवन बनकर तैयार हो गया और इसे अस्पताल प्रबंधन को हस्तांतरित कर दिया गया। जरूरी संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता न होने से संचालन शुरू नहीं हो सका। करीब सात साल से अधिक समय से भवन का इस्तेमाल नहीं होने के कारण यहां धूल जम गई और परिसर की स्थिति भी खराब होती गई। संवाद न्यूज एजेंसी ने समाचारीय अभियान शुरू किया तो मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसका ताला खुलवाया। इसके अंदर की सफाई शुरू कराई है। साथ ही इसे जल्द शुरू करने पर पहल की जाने लगी है।
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यूनिट की सफाई शुरू होना संचालन की दिशा में पहला कदम है लेकिन मरीजों को सुविधा देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। बर्न और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यूनिट शुरू होने से जिले के मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, संचालन कब तक शुरू होगा, यह जरूरी संसाधनों की उपलब्धता और विभागीय तैयारियों पर निर्भर करेगा।
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गंभीर मरीज होते रेफर
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की इमरजेंसी में साल भर में मामूली रूप, गंभीर रूप से झुलसे करीब 30 से 40 मरीज आते हैं, 40 फीसद से अधिक झुलसे मरीजों को संसाधन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते रेफर करना मजबूरी होता है। बर्न यूनिट बंद होने से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है। समय पर विशेषज्ञ उपचार की जरूरत के बीच मरीजों को दूसरे शहर ले जाने की परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इलाज और आने-जाने का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। भवन बनने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा नहीं मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
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बयान...
प्लास्टिक सर्जरी, बर्न यूनिट के संचालन के लिए पहल शुरू की गई है। सालों से बंद पड़ी यूनिट को खोल कर देखा गया है। अंदर की सफाई कराई जा रही है। जहां पर जो खामियां हैं उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। बेड, वार्ड, पंजीकरण कक्ष व परिसर को साफ करा दिया गया है। कर्मचारियों से भवन के अंदर धुलाई भी कराई गई है। उपकरणों की जांच की जा रही है। मानव संसाधन व विशेषज्ञ डॉक्टर व अन्य खामियां ठीक कराने के लिए शासन में पत्राचार किया गया है। जल्द ही इसका संचालन शुरू कराया जाएगा। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज अकबरपुर
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