संतों ने कहा भगवान बुद्ध भी खड़े हुए थे अन्याय के खिलाफ
अत्याचार, आतंकवाद और अनाचार फैलाने वालों के खिलाफ हिंसा छेड़ने की बात शांति के अनुयायी माने जाने वाले बौद्ध संतों ने कही है। बौद्ध संतों का कहना है कि उन्हें बुरे लोगों से लड़ने में कोई परहेज नहीं है। भगवान बुद्घ अहिंसा के पुजारी थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्होंने भी युद्घ को स्वीकारा। विश्व में धर्म निरपेक्षता जैसा कुछ भी नहीं है। जैसे को तैसा वाली नीति जरूरी है।
शुक्रवार को धम्म चेतना यात्रा के समापन अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ मंच पर बैठे धम्म गुरुओं ने प्रदेश की अखिलेश सरकार को माफिया, बाहुबलियाें की सरकार कहकर सभी को चौंका दिया। संत शांति मित्र ने कहा कि विश्व में धर्म निरपेक्षता जैसा कुछ भी नहीं है। भगवान बुद्घ अहिंसा के पुजारी थे लेकिन उन्होंने उग्रवाद, आतंकवाद के खात्मे के लिए हिंसा को अपनाने का संदेश भी दिया है। संत पंडितानंद ने तो यहां तक कह दिया कि बौद्घ अनुयायी खून खराबा नहीं चाहते लेकिन जरूरी हुआ तो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे। संतों की इस तरह की भाषणबाजी पर मंच पर बैठे शाह और प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद ने ताली बजाकर स्वागत किया। संत आर्यवंश ने कहा कि प्रदेश का हाथी मतवाला हो गया है और साइकिल के जरिये लोगों को घायल किया जा रहा है। इन्हें रोका नहीं गया तो प्रदेश तहस नहस हो जाएगा। बौद्घ संतों के साथ अमित शाह ने भी कहा कि भगवान बुद्घ अहिंसा के पुजारी थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्होंने युद्घ को स्वीकारा था।