दो महीने तक शहर में बसपा का कोई कार्यक्रम नहीं होगा। इस कार्रवाई की वजह पिछले महीने आचार संहिता के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन समारोह में खुलेआम नोट बांटने के मामले में बसपा जिलाध्यक्ष आरके भास्कार की ओर ओर से संतोषजनक जवाब नहीं देना है।
सिटी मजिस्ट्रेट आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि अब दुबारा से उनसे सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा जा रहा है। इसलिए जवाब, सीडी की कॉपी नहीं देने तक या अधिकतम दो माह तक बसपा को किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी।
शहर में शायद इस तरह का यह पहला मामला है जब किसी पार्टी के कार्यक्रम को आयोजित करने पर रोक लगाई गई हो। 15 जनवरी को नानाराव पार्क में आयोजित समारोह में विधान परिषद स्नातक चुनाव के कारण आचार संहिता लगी होने के बावजूद मंच से पब्लिक को पांच-पांच हजार रुपये के लिफाफे बांटे गए थे।
यह असलियत ‘अमर उजाला’ में उजागर होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्यक्रम आयोजक बसपा जिलाध्यक्ष को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था।
जिलाध्यक्ष ने जवाब में कहा था कि मंच पर कोई भी कानपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित व्यक्ति नहीं था न ही किसी ने स्नातक चुनाव के बारे में कोई बयान दिया। कार्यक्रम की वीडियोग्राफी की सीडी अभी नहीं मिली है।
इसके अलावा कार्यक्रम में किसी प्रकार का धन या अन्य वस्तु वितरण की जानकारी मुझे नहीं है। इस तरह के आरोप निराधार हैं।
जवाब से असंतुष्ट सिटी मजिस्ट्रेट आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने ‘अमर उजाला’ में छपी खबर को संज्ञान में लेते हुए कहा कि न्यूज पेपर में छपी फोटो साफ बता रही हैं कि पैसा बांटा गया है।
कार्यक्रम की अनुमति लेते वक्त यह बात छिपाई गई थी। यह कार्यक्रम की अनुमति की शर्तों का उल्लंघन है। जिलाध्यक्ष को फिर से नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण और कार्यक्रम की वीडियो सीडी भी मांगी जा रही है।
जवाब मिलने और सीडी देखने के बाद आचार संहिता उल्लंघन में कार्रवाई तय होगी।
इस मामले पर सिटी मजिस्ट्रेट से बात की जाएगी। अगर जवाब मांगा जा रहा है तो वह अपना जवाब फिर से दे देंगे। इतना ही कहना है। मैं रविदास जयंती के कार्यक्रम में हूं। आवाज भी साफ नहीं आ रही है।
-आरके भास्कर, जिलाध्यक्ष बसपा