बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मंडलीय समीक्षा बैठक में संगठन और विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर किए गए बदलाव की घोषणा नहीं की गई। पार्टी नेताओं में इस बात का भय था कि पद से हटाए गए लोग हंगामा कर सकते हैं।
इसके चलते जोनल कोआर्डिनेटरों की मंगलवार को हई बैठक में सिर्फ कैडर पर ही चर्चा की गई। साथ ही जिन लोगों को पद और टिकट दिया गया है, उनके कान में मंत्र की तरह अपनी बात फूंक दी गई। वहीं, बैठक में भाग लेने आए हैरान थे घोषणा न होने से हैरान थे। इनको भोजन कराकर विदा कर दिया गया।
पिछले दिनों लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती ने जिलाध्यक्ष, मंडल और जोनल कोआर्डिनेटर के साथ कल्याणपुर और गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों में बदलाव कर दिया था।
उस समय मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्धार्थ ने कहा था कि 23 फरवरी की बैठक में बदलाव की घोषणा की जाएगी लेकिन मंगलवार को जब बैठक हुई तो पदाधिकारियों को यह भनक लग गई कि लोग बगावत कर सकते हैं, इसलिए कुछ भी नहीं कहा गया। सिर्फ परिचय के साथ कैडर को मजबूत करने की बात कही गई।
बताया जा रहा है कि सभी को प्रदेश इकाई से यह बता दिया गया है किसे कौन सी जिम्मेदारी मिली है। इस बीच कुछ लोगों को जाति के आधार पर भाईचारा कमेटी का प्रमुख भी बनाने की बात उनके कान में बता दी गई।
दरअसल जाति आधारित संगठन पर कोर्ट की रोक होने से पार्टी को डर है कि उन पर कार्रवाई न हो जाए। बैठक में पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सलीम अहमद, जिलाध्यक्ष प्रशांत दोहरे, पूर्व जिलाध्यक्ष रामकृष्ण भाष्कर, जोनल कोआर्डिनेटर शमसुद्दीन राइन सहित काफी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।