बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व जोनल कोआर्डिनेटर आसकरन संखवार को निकाल दिया है। शुक्रवार को महानगर पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज ने पार्टी की मंडलीय बैठक में इसकी घोषणा की। कहा कि अनुशासनहीनता करने वालों को पार्टी में जगह नहीं मिलेगी।
चाहे वह दलित ही क्यों न हो। वहीं, चर्चा यह भी है कि बसपा अब दलितों की उपेक्षा पर उतर आई है। गौरतलब है कि पिछले करीब दो महीने के अंतराल में संखवार सहित पांच दलित पदाधिकारियों को पद और पार्टी से निकाला जा चुका है।
कुछ समय पहले तक बसपा में जोनल कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाल रहे आसकरन संखवार को शुक्रवार को पार्टी की मंडलीय बैठक में पार्टी से भी निकाल दिया गया। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि आसकरन के खिलाफ जनपदों से कई शिकायतें आ रही थीं।
यह वही आसकरन हैं, जो पार्टी में कथित मठाधीशों की पोल खोलने के लिए बिना इजाजत मायावती से मिलने उनके दिल्ली स्थित आवास पर चले गए थे। जिसका खामियाजा उन्हें पद और पार्टी से हाथ धोकर उठाना पड़ा है।
बसपा की स्थानीय इकाई से अभी तक जो पदाधिकारी पद और पार्टी से निकाले जा चुके हैं, उनमें जोनल कोआर्डिनेटर पीसी गौतम, जिलाध्यक्ष जयनारायण कुरील मुकेश, लोकसभा प्रभारी सुनील कुरील, जिला महासचिव अरविंद मठिया बाल्मीकि और जोनल कोआर्डिनेटर आसकरन संखवार शामिल हैं।
इसके अलावा कई ऐसे दलित नेता है जिन्हें पार्टी में पद से हटाकर साइड लाइन कर दिया गया है। उसमें जोनल कोआर्डिनेटर रहे अशोक कुमार, जोनल कोआर्डिनेटर चंद्रसेन आनंद और पूर्व जिलाध्यक्ष एसपी टेकला प्रमुख हैं।
जिन दलित नेताओं के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाई की है, उन पर अनुशासनहीनता के आरोप हैं। ऐसे में इन लोगों को पार्टी से निकाले जाने पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हमने संखवार के खिलाफ की गई कार्रवाई की सूचना हाईकमान को भेज दी है
-अशोक सिद्धार्थ जोनल कोआर्डिनेटर