चित्रकूट में रामघाट-नयागांव मार्ग पर मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ में पुल बह गया। अभी भी गूगल रास्ता दिखा रहा है। लोगों को पुल के पास पहुंचने पर रास्ता बंद मिलता है और उन्हें लौटना पड़ता है।
चित्रकूट के मंदाकिनी की भीषण बाढ़ में रामघाट से नयागांव होते हुए हनुमान धारा जाने वाले मार्ग पर बना पुल बह गया, लेकिन गूगल मैप पर अब भी यही रास्ता चालू दिखाई दे रहा है।
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ऐसे में दूसरे शहरों व राज्यों से आने वाले अनजान बाइक व कार सवार मोबाइल में बताए रास्ते पर चलते हुए टूटे पुल तक पहुंच रहे हैं। मौके पर रास्ता बंद देखकर उन्हें लौटना पड़ रहा है।
सबसे चिंता की बात यह है कि पुल टूटने के बाद भी मार्ग पर एमपी प्रशासन की ओर से न बैरिकेडिंग की गई और न ही कोई बड़ा चेतावनी संकेतक लगाया गया है। मंदाकिनी का पानी उतरने के बाद भी पुल से आवागमन शुरू नहीं हो सका है।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाहर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक स्थानीय रास्तों से परिचित नहीं होते। वह गूगल मैप पर भरोसा कर सीधे टूटे पुल तक पहुंच जाते हैं। बारिश, अंधेरा या कम दृश्यता के दौरान यह स्थिति और खतरनाक हो सकती है।
हनुमान धारा जाने के लिए दूसरे राज्यों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट आते हैं। मोबाइल में गूगल मैप पर रास्ता खुला दिखाई देने के कारण अनजान वाहन चालक उसी मार्ग पर आगे बढ़ जाते हैं। पुल के पास पहुंचने पर रास्ता बंद मिलता है और उन्हें लौटना पड़ता है।
पहले भी हो चुके हादसे, फिर भी नहीं चेतावन
टूटे पुल के हिस्से से गूगल मैप के बताए रास्ते पर कई लोग आगे बढ़ चुके हैं और अपनी जान गंवा चुके हैं। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल दोनों ओर मजबूत बैरिकेडिंग कराए और बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए।
233 नाविक परिवारों को रोजी-रोटी पर संकट
जिस मंदाकिनी की लहरों पर नाव चलाकर नाविक श्रद्धालुओं को चित्रकूट के घाटों और मंदिरों तक पहुंचाते हैं, आज उसी नदी की बाढ़ ने उनकी जिंदगी की नाव रोक दी है। 24 अगस्त से जलस्तर बढ़ने के बाद रामघाट पर नावों का संचालन बंद है। करीब 20 दिन से कमाई ठप होने से 233 नाविक परिवारों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ में 35 से अधिक नावें तेज धारा में बहकर नष्ट हो गईं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा तक नहीं मिला है।
रामघाट नाविक संघ के मुताबिक चित्रकूट में यूपी के 96 और मध्य प्रदेश के 137 नाविक पंजीकृत हैं। दोनों राज्यों की सीमा से जुड़ा होने के कारण नाविकों को राहत और मुआवजे के लिए भी अलग-अलग व्यवस्थाओं के बीच भटकना पड़ रहा है। बाढ़ से हुए नुकसान के बाद भी अभी तक न यूपी सरकार से मुआवजा मिला और न एमपी से।
बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यूपी और एमपी के 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। मंदाकिनी में 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में रामघाट के कई नाविकों की नावें बह गईं। नावें नष्ट होने और नदी में नौका संचालन बंद होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
बोले नाविक-कोई सहायता नहीं मिली
बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। कमाई का साधन पूरी तरह बंद है। उधार लेकर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।- होरी लाल निषाद।
29 अगस्त की बाढ़ में नाव बह गई। नाव को बचाने के प्रयास में खुद भी तेज धारा में कुछ दूर तक बह गए। किसी तरह जान बची। अब नाव के साथ परिवार की रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।- श्रवण कुमार।
बाढ़ के दौरान नाविकों ने घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कई लोगों की जान बचाई लेकिन अब नाविक परिवारों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। किसी तरह घर का खर्च चल रहा है।- मिथुन।
अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराएंगे
रामघाट नाविक संघ के अध्यक्ष राम नारायण निषाद ने कहा कि बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद की। इसके बाद भी नाविकों के परिवारों को राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जल्द ही नावों पर बोर्ड लगाकर विरोध जताया जाएगा। प्रोटोकॉल के तहत आने वाले अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराई जाएगी।