कानपुर में घूसखोरी के मामले में पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बुधवार रात इंस्पेक्टर कल्याणपुर जनार्दन प्रताप सिंह और सिपाही धीरेंद्र को निलंबित कर दिया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। एडीसीपी ट्रैफिक डॉ. अनिल कुमार दोनों की जांच करेंगे। जांच के बाद दोनों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नर ने कहा कि यदि पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार करता है या अपराधियों से सांठगांठ रखेगा तो उस पर इसी तरह की कार्रवाई होगी। 28 मार्च को पनकी रोड स्थित बीयर शॉप पर आकर टॉप टेन अपराधी भानू ठाकुर ने दुकान मालिक मोनू गौड़ से मारपीट कर उनको लहूलुहान कर दिया था।
कल्याणपुर पुलिस ने मोनू पर ही मुकदमा दर्ज कर हवालात में बंद कर दिया था। डीसीपी वेस्ट से शिकायत के बाद मोनू की तहरीर पर भानू व अन्य आरोपियों पर हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था। दो दिन बाद मोनू की पत्नी ने प्रियंका ने आरोप लगाया था कि मोनू को थाने से छोड़ने के लिए इंस्पेक्टर जनार्दन प्रताप सिंह ने सिपाही धीरेंद्र की मदद से एक लाख रुपये वसूले।
अफसरों से शिकायत के कुछ देर बाद यह रकम प्रियंका को पुलिसकर्मी ने वापस कर दी थी। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने मामले को संज्ञान में लेकर एडीसीपी पश्चिम अभिषेक अग्रवाल को जांच सौंपी थी। जिसमें दोनों पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। लिहाजा तत्काल प्रभाव से इंस्पेक्टर और सिपाही निलंबित किए गए।
जांच में आरोप सही मिलने पर निलंबन की कार्रवाई कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। कोई भी पुलिसकर्मी अगर भ्रष्टाचार करता है या अपराधियों से सांठगांठ रखेगा तो उस पर इसी तरह की कार्रवाई होगी। आरोपी गंभीर हुए तो एफआईआर भी दर्ज होगी। - असीम अरुण, पुलिस कमिश्नर कानपुर