दादानगर पुल पर शुरू हुई वन-वे व्यवस्था ने समस्या और बढ़ा दी है। इससे दादा नगर के उद्यमी खासे परेशान हैं। कहते हैं पहले तो कभी-कभी जाम से जूझना पड़ता था। अब तो रोज का काम हो गया।
बिना किसी प्लानिंग के वन-वे किए जाने से यह परेशानी सामने आ रही है। फैक्ट्री एरिया भी प्रभावित हो रहा है। माल लाने ले जाने वाले वाहन जाम का कारण बन रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि फैक्ट्री आने वाले लंबा चक्कर तो काटकर आ ही रहे हैँ, इसके अलावा मजदूर और कर्मचारी भी जाम के कारण देरी से फैक्ट्री पहुंच रहे हैं।
उद्यमी कहते हैं कि व्यवस्था पहले ही वाली बेहतर थी। बस थाने और ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी नियमित कर दी जाती। फैक्ट्री एरिया की ओर आने और जाने वाले लोग अब दादानगर से सीटीआई की ओर जाने वाली नहर रोड से गुजर रहे हैं।
पहले साइकिल और रिक्शा ही दिखाई देते थे, अब कारों की लाइनें लगती हैं। रोड भी अवैध कब्जों और सिल्ट की गिरफ्त में है। इसकी वजह से जाम भी लगता है।
फैक्ट्री एरिया पर एक नजर
कुल फैक्ट्रियां : करीब 4000
कुल उद्यमी : छह से सात हजार
कर्मचारी व लेबर : 3.50 लाख
लोडर- 1000-1200 (रोजाना आवागमन)
डीसीएम- 400-500
ट्रक व कंटेनर- 250-400
कारें- 3000-5000
बाइक व स्कूटर- 15,000
खड़खड़े और भैंसा ठेला- 150-250
ये सुझाव दिए
विजय नगर रोड से अतिक्रमण हटाया जाए और डिवाइडर पतला किया जाए।
विजयनगर से सीटीआई तक के रास्ते को फोरलेन में तब्दील किया जाए।
विजयनगर, दादानगर मोड़ और सीटीआई पर ट्रैफिक पुलिस की नियमित ड्यूटी लगे।
भारी वाहनों को रात आठ की बजाए दस बजे से एंट्री दी जाए।
रोडवेज और प्राइवेट बसों के आवागमन का रास्ता अर्मापुर से ही रखा जाए।