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58 डिब्बों की मालगाड़ी ऊपर से गुजर गई लेकिन फिर हुआ ऐसा चमत्कार कि जान बच गई

Wed, 08 Nov 2017 07:57 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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कानपुर देहात के जहानाबाद रेलवे क्रासिंग के पास बुधवार की सुबह एक छात्र आत्महत्या के इरादे से  ट्रैक पर लेट गया। पल भर में उसके ऊपर से धड़धड़ाती हुई मालगाड़ी निकल गई। यह दृश्य देखकर लोगों की सांसें थम गईं। मालगाड़ी गुजर गई, लेकिन छात्र को जिंदा देखकर सभी चकित रह गए। बाद में परिजनों को सूचना दी गई। छात्र ने बताया कि उसकी मां की मौत हो चुकी है और वह मां के बिना जीना नहीं चाहता है।
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सुबह 10 बजे घाटमपुर कस्बे के जहानाबाद रोड रेलवे क्रासिंग का फाटक बंद था, और ट्रैक पर मालगाड़ी आ रही थी। तभी स्कूल की यूनिफार्म में धीरज सचान (12) पुत्र अनिल सचान निवासी ग्राम पासीखेड़ा (घाटमपुर) साइकिल से आया और साइकिल खड़ी कर रेलवे ट्रैक (कानपुर-बांदा) पर जाकर लेट गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, इसी बीच धड़धड़ाती हुई मालगाड़ी आ गई। लोगों के देखते ही देखते पूरी 58 बोगी डिब्बों की मालगाड़ी छात्र के ऊपर से निकल गई। वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि पूरी ट्रेन गुजरने में करीब 8 मिनट का समय लग गया। लोग सांस रोके देखते रहे।
  मालगाड़ी निकलते ही लोग ट्रैक पर पहुंचे लेकिन, वहां बालक को जिंदा देखकर स्तब्ध रह गए। रेलवे फाटक के पास दुकान किए कस्बा निवासी दिलीप चक ने धीरज को ट्रैक पर से उठाया, और उसे अपनी दुकान के बाहर ले जाकर बैठाया। थोड़ा सामान्य होने पर उसने अपना नाम, पता बताया। उसने बताया कि वह किसान बालिका इंटर कालेज में कक्षा-8 का छात्र है। उसके पास स्कूल का कार्ड और कापी-पेन भी मिले। जिसके आधार पर उसके घर और कालेज में सूचना भेजी गई। छात्र के ऊपर से मालगाड़ी के गुजर जाने और उसको खरोंच तक न आने की घटना को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। वहां मौजूद सुबोध त्रिपाठी, सुभाष सिंह चौहान, मो.महमूद, दिनेश सचान और खलीफा नदीम इलाही ने बताया कि यहां पर कहावत- जाको राखे साइयां, मार सके न कोय चरितार्थ होती है।
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...पखवारे भर पहले हुई थी मां की मौत
घाटमपुर। रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने पहुंचे छात्र धीरज के परिजन और शिक्षक खबर पाते भागकर घाटमपुर आए। उन्होंने बताया कि धीरज की मां की 22 अक्तूबर को बीमारी से मौत हो चुकी है। मां की मौत के बाद से धीरज सदमे में रहता है। दो भाइयों में वह छोटा है, जिसके चलते मां से काफी प्यार करता था। पिता अनिल सचान ने बताया कि चार-पांच दिन पहले भी फांसी लगा जान देने की कोशिश की थी। इधर, कालेज के प्रधानाचार्य विनय मिश्रा ने बताया कि अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। सुबह धीरज स्कूल नहीं आया तो तलाश शुरू कराई गई। बताया कि थोड़ी देर बाद उसके रेलवे ट्रैक पर लेटने की जानकारी मिली।
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