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Kanpur News: क्लीन टेक्नोलॉजी और पीएनजी से घटा सकते बॉयलरों का प्रदूषण

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कानपुर। इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आईएफओआरईएसटी) ने मंगलवार को बेनाझाबर रोड स्थित होटल में कार्यशाला आयोजित की। यह बाॅयलर निदेशालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से हुई। इसमें कानपुर के लघु उद्योगों को बॉयलर से कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण कम करने का प्रशिक्षण और जानकारी दी गई।
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विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदेश में करीब 2,800 स्टीम बॉयलर चल रहे हैं। यह देश के कुल बॉयलर का लगभग छह प्रतिशत हैं। शहर में 100 से ज़्यादा यूनिट्स लगे हुए हैं। यह औद्योगिक वायु प्रदूषण का बड़ा स्रोत हैं। इसकी उपयोगिता फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, केमिकल, फार्मास्युटिकल, पेपर और शुगर जैसे कई एमएसएमई सेक्टरों में है। बॉयलरों की क्षमता बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन घटाना देश के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।
डायरेक्टर, ईएसजी एंड इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइज़ेशन (आईएफओआरईएसटी) संजीव कुमार कंचन ने कहा कि उद्योग और बॉयलर ऑपरेटरों के साथ मिलकर स्वच्छ और अधिक कुशल इंडस्ट्रियल हीट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस दौरान क्लीन टेक्नोलॉजी, बायोमास और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) जैसे स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल, प्रदूषण-नियंत्रण उपकरणों को अपनाने और बॉयलर को अधिक कुशलता से चलाने की जानकारी दी गई। बॉयलर निदेशक संदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि संस्था कई राज्य सरकारों, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर बॉयलर परफॉर्मेंस बेहतर बनाने में मदद कर रहा है। बॉयलर के संचालन में सुधार से ईंधन और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। गौरव चंद्रा, श्वेता सिंह के अलावा उद्यमी, बॉयलर ऑपरेटर, यूपीसीडा के अधिकारी आदि थे।
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