रोगी के शरीर का वजन सामान्य या इससे कम है, फिर भी लिवर की जांच से लग रहा है कि यह किसी मोटापाग्रस्त व्यक्ति का लिवर है। इस तरह के लक्षण वाले मर्ज को लीन नैश नाम दिया गया है। इसका मतलब है कि लीन नॉन अल्कोहलिक स्टीटो हेपेटाइटिस। ऐसा क्यों हो रहा है? इसकी माकूल वजह न मिलने पर अब आयुर्वेद के सिद्धांतों का सहारा लिया जा रहा है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई के गैस्ट्राइंटोलॉजी विभाग ने 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 60 रोगियों पर शोध किया है।
शोध के अगुवा गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार का कहना है कि इससे बात गलत साबित हो रही है कि सिर्फ मोटापाग्रस्त या अधिक शराब पीने वालों का लिवर स्टीटो हेपेटाइटिस की चपेट में आता है। जिन रोगियों को शोध में शामिल किया गया, उनमें न तो शराब पीने की लत रही और न ही मोटापाग्रस्त थे। जब बॉयोप्सी, अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन आदि जांचें कराई गईं तो लिवर फैटी निकला। कुछ में फाइब्रोसिस जैसी स्थिति मिली। सटीक कारण न मिलने पर इसे पेट के गट माइक्रोबायोटा से जोड़कर देखा जा रहा है। यह आयुर्वेद के सिद्धांत पर आधारित है कि बीमारियों की जड़ पेट निकलती है।