फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बात सेहत की: शरीर का वजन कम…फिर भी लिवर का फूल रहा दम, रोगों के नए कारणों पर हो रहा है अध्ययन, ऐसे करें बचाव

Fri, 28 Feb 2025 05:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि शरीर में कम चर्बी वाले लोगों को भी स्टीटो हेपेटाइटिस हो सकती है। इससे मोटापाग्रस्त लोगों के साथ ही सामान्य या कम वजन वाले लोगों को भी लिवर के प्रति सचेत रहना चाहिए।
विज्ञापन
लिवर - फोटो : Freepik.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रोगी के शरीर का वजन सामान्य या इससे कम है, फिर भी लिवर की जांच से लग रहा है कि यह किसी मोटापाग्रस्त व्यक्ति का लिवर है। इस तरह के लक्षण वाले मर्ज को लीन नैश नाम दिया गया है। इसका मतलब है कि लीन नॉन अल्कोहलिक स्टीटो हेपेटाइटिस। ऐसा क्यों हो रहा है? इसकी माकूल वजह न मिलने पर अब आयुर्वेद के सिद्धांतों का सहारा लिया जा रहा है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई के गैस्ट्राइंटोलॉजी विभाग ने 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 60 रोगियों पर शोध किया है।

विज्ञापन

शोध के अगुवा गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार का कहना है कि इससे बात गलत साबित हो रही है कि सिर्फ मोटापाग्रस्त या अधिक शराब पीने वालों का लिवर स्टीटो हेपेटाइटिस की चपेट में आता है। जिन रोगियों को शोध में शामिल किया गया, उनमें न तो शराब पीने की लत रही और न ही मोटापाग्रस्त थे। जब बॉयोप्सी, अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन आदि जांचें कराई गईं तो लिवर फैटी निकला। कुछ में फाइब्रोसिस जैसी स्थिति मिली। सटीक कारण न मिलने पर इसे पेट के गट माइक्रोबायोटा से जोड़कर देखा जा रहा है। यह आयुर्वेद के सिद्धांत पर आधारित है कि बीमारियों की जड़ पेट निकलती है।

लोगों को लिवर के प्रति सचेत रहना चाहिए
उन्होंने बताया कि प्रांरभिक शोध में 60 लोग शामिल रहे हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 42 पुरुष रहे हैं। शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि शरीर में कम चर्बी वाले लोगों को भी स्टीटो हेपेटाइटिस हो सकती है। इससे मोटापाग्रस्त लोगों के साथ ही सामान्य या कम वजन वाले लोगों को भी लिवर के प्रति सचेत रहना चाहिए। खानपान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इस उभरते ट्रेंड पर विश्व भर के लिवर से संबंधित चिकित्सा विज्ञानियों के संगठन पर इस स्थिति पर निगाह रखे हुए हैं। साथ ही खानपान की चीजों और तरीकों पर अभी विस्तृत शोध किए जाने की जरूरत है।

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्टडी ऑफ लिवर डिजीजेज और विश्व के दूसरे संगठनों ने लिवर रोगों का एक समूह बना दिया है। इसका नाम मेटाबोलिक एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज नाम रखा गया है। इसमें नैश, फैटी लिवर, डायबिटीज, मोटापा समेत अन्य रोगों से होने वाले लिवर के मर्ज को शामिल किया गया है। लिवर रोगों के नए कारणों पर भी अध्ययन किया जा रहा है।  -डॉ. विनय कुमार, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोइंटोलॉजी

विज्ञापन

बचाव के लिए करें ये
  • संतुलित आहार लें।
  • हरी सब्जियों और सलाद का भरपूर सेवन करें।
  • जंक फूड से परहेज करें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • पतले लोग भी मोटापाग्रस्त वालों जैसा एहतियात बरतें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें