कानपुर। उजियारीपुरवा में गुरुवार सुबह संजय उर्फ लाला (32) का शव संदिग्ध परिस्थितियों में घर के बरामदे में भरे बाढ़ के पानी में उतराता मिला। वह दो दिन से लापता था। परिजन और मकान मालिक ने करंट लगने का अंदेशा जताया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर में गहरी चोट लगने के बाद कोमा में जाने से मौत होने की पुष्टि हुई। पुलिस हत्या और हादसे के एंगल से जांच कर रही है।
पुताई कारीगर संजय करीब 10 साल से मकान मालिक श्याम बाबू के मकान के निचले हिस्से में मां तारा देवी के साथ रह रहा था। उजियारीपुरवा में करीब 20 दिन से बाढ़ के हालात हैं। तारा देवी लालबंगला स्थित चचेरे भाई के घर चली गई थीं। संजय मकान में अकेला था। श्याम बाबू के मुताबिक वह पिछले दो दिनों से दिखाई नहीं दिया, जिस पर उसकी बहन मोना और प्रीती को कॉल की। संजय उनके यहां भी नहीं था। निचले कमरे में उसकी तलाश की, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। प्रीती के पति शेखर को सूचना दी। संजय के नंबर पर कॉल की गई तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे श्याब बाबू की नजर बरामदे में भरे बाढ़ के पानी पर गई तो उसमें संजय का शव उतराता मिला। नवाबगंज पुलिस को सूचित किया। पुलिस लोडर से मकान के बाहर पहुंची और फिर दूसरे के मकान से दीवार फांदकर छत के रास्ते निचले हिस्से तक पहुंची। शुरुआत में करंट लगने की आशंका जताई गई। नवाबगंज इंस्पेक्टर राजकेसर ने बताया कि तहरीर मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मकान मालिक ने बताया कि तारा देवी से बेटे की मौत का राज छिपाया गया है।
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सिर की चोट ने बढ़ाए सवाल
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि सिर पर दाहिनी ओर कान के ऊपर गहरी चोट थी। चोट के बाद संजय कोमा में चला गया और उसकी मौत हो गई। वहीं पानी में डूबने या करंट लगने से मौत की पुष्टि नहीं हुई।
घटना पर उठ रहे सवाल
संजय के सिर में चोट किन परिस्थितियों में लगी और वह बरामदे के पानी तक कैसे पहुंचा, इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच में सामने आएगा। फिलहाल मौत को लेकर हत्या या हादसे का रहस्य बरकरार है।