फिल्म आई थी ‘नायक ’ जिसमें अनिल कपूर एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनते हैं और सारे एक्शन ऑन द स्पॉट लेते हैं। पर हमारे शहर के नायक एक्शन लेने में कितने संजीदा हैं, इसका नमूना देखिए। जिस ब्लड बैंक को बंद किया गया, वह धड़ल्ले से ब्लड बेचने का धंधा कर रहा है।
गत तीन जनवरी को खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त बादल चटर्जी की टीम ने अनियमितताएं मिलने पर गुमटी नंबर नौ स्थित संजीवनी ब्लड बैंक और विजय नगर स्थित सीएल मेमोरियल ब्लड बैंक को बंद करने का आदेश जारी किया था।
इन दोनों ब्लड बैंकों के लाइसेंस निरस्त करने की बात कही गई थी। साथ में कहा गया था कि दोनों ब्लड बैंक न खुलने पाएं इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस पर होगी। सरकारी रिकॉर्ड में तीन जनवरी से दोनों ब्लड बैंक बंद हैं।
पर मंगलवार को ‘अमर उजाला’ ने नमूने के तौर पर संजीवनी ब्लड बैंक को देखा तो हकीकत कुछ और मिली। आप भी खुद देख लीजिए। पेश है रिपोर्टर दुर्गेश त्रिपाठी की पड़ताल करती रिपोर्ट...
दोपहर करीब दो बजे रिपोर्टर संजीवनी ब्लड बैंक गुमटी नंबर नौ पहुंचा। बेसमेंट में बने संजीवनी ब्लड बैंक का शटर खुला था। बगल के दुकानदार से पूछा कि यह ब्लड बैंक तो बंद हो गया था तो ताला कैसे खुला, दुकानदार ने उल्टा सवाल कर दिया कि, ‘कब, ब्लड बैंक पर ताला लगा था’।
सीढ़ियों से नीचे जाकर शीशे का दरवाजा खोलकर अंदर गया तो एक महिला ने आने की वजह पूछी। उनसे कहा कि ब्लड चाहिए। महिला ने ब्लड ग्रुप पूछा। एबी पॉजिटिव ग्रुप बताने के बाद उन्होंने जवाब दिया कि मिल जाएगा।
कितने रुपये लगेंगे के सवाल पर कहा कि एक डोनर और आठ सौ रुपये लगेंगे। ब्लड में शुद्धता तो रहेगी के सवाल पर महिला ने कहा कि हमारे यहां शुद्धता की गारंटी होती है, यहां प्रोफेशनल डोनर से ब्लड नहीं लिया जाता है।
चलते-चलते महिला से पूछा कि ब्लड मौजूद तो रहेगा, उन्होंने कहा कि शाम छह बजे तक आपका इंतजार करेंगे इसके बाद एबी पॉजिटिव ग्रुप के ब्लड की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
इसके बाद रिपोर्टर वापस चला आया। शाम करीब 5:48 बजे संजीवनी ब्लड बैंक के डॉट नंबर पर फोन किया तो उसी महिला ने रिसीव किया। उनसे फिर ब्लड मिलने की बात की तो उन्होंने कहा कि मिल जाएगा।
यह कहने पर कि अखबारों में छपा था कि आपका ब्लड बैंक बंद कर दिया गया है तो महिला ने कहा कि वह सब छोड़िए, आपको ब्लड मिल जाएगा। रात करीब 9 साढ़े नौ बजे रिपोर्टर फिर ब्लड बैंक पहुंचा तो वहां दो युवक अपना ब्लड डोनेट कर रहे थे।
दोनों से ब्लड का यूजर चार्ज 16 सौ रुपया लिया गया और ब्लड दे दिया गया। इस संबंध में संजीवनी ब्लड बैंक के डॉ. संजीव सिक्रोरिया से बात करने की कोशिश की गई।
वहां मौजूद कर्मचारी से नंबर मांगा तो उसने डॉक्टर साहब का पर्सनल नंबर देने से मना कर दिया। बोला कि सुबह 11 बजे से दो बजे के बीच डॉक्टर साहब बैठते हैं, आपकी तभी बात हो पाएगी।
खोलने का कोई आदेश नहीं हुआ है
तीन जनवरी को टीम के साथ छापा मारने पहुंचे लखनऊ के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर (एडीसी) पीपी सिंह से संजीवनी ब्लड बैंक खोलने के संबंध में कोई आदेश जारी करने के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है।
संजीवनी ब्लड बैंक को बंद किया गया था और संबंधित थाने को मौखिक और लिखित जानकारी दे दी गई थी। ब्लड बैंक कैसे खुल गया है इसके बारे में लोकल अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।
मुझे कोई आदेश नहीं मिला
काकादेव एसओ शशिभूषण मिश्रा ने कहा कि संजीवनी ब्लड बैंक न खोलने देने संबंधी उन्हें आज तक कोई आदेश नहीं मिला है। न तो मौखिक और न ही लिखित।
उन्होंने एडीसी को आदेश के संबंध में बात करने के लिए फोन भी मिलाया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में एसओ ने कहा कि हो सकता है कि कप्तान साहब के यहां पत्र दिया गया हो लेकिन वहां से भी अब तक पत्र आ जाना चाहिए था।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि उनकी गाजियाबाद में चेकिंग अभियान में ड्यूटी लगी है। वह ब्लड बैंक पर कार्रवाई के बाद से ही गाजियाबाद हैं।
दूसरे ड्रग इंस्पेक्टर एजाज अहमद ने बताया कि संजीवनी ब्लड बैंक को खोलने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। यदि ब्लड बैंक खुला है तो गलत है।