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Kanpur News: जल्द शुरू होगी ब्लड कंपोनेंट यूनिट, दूर की जा रहीं खामियां

Sun, 08 Jun 2025 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। अकबरपुर स्थित मेडिकल कॉलेज की ब्लड कंपोनेंट यूनिट जल्द शुरू होने की आस जगी है। केंद्रीय टीम द्वारा बताई खामियों को दूर कराया जा रहा है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की केंद्रीय टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
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जिले में मेडिकल कॉलेज के संचालन के बाद अब कई सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में संचालित ब्लड बैंक से अभी ब्लड को बिना कंपोनेंट किए ही दिया जा रहा है। इससे एक यूनिट ब्लड तीन लोगों की जान बचाने की जगह एक ही व्यक्ति को लाभ पहुंचा पा रहा है। इसके पीछे ब्लड बैंक के ब्लड कंपोनेंट यूनिट संचालन का लाइसेंस न होना है। हद तो तब हुई जब 18 अगस्त 2023 को तत्कालीन प्रभारी मंत्री ने ब्लड कंपोनेंट यूनिट का लोकार्पण कर दिया। अब तक करीब 1200 यूनिट ब्लड मरीजों को दिया जा चुका है। यदि यह ब्लड कंपोनेंट के रूप में दिया जाता तो 3600 मरीजों को लाभ पहुंचाता।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तुषार शुक्ला ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट यूनिट का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए छह मार्च को आवेदन किया गया था। 23 मई को केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने निरीक्षण कर 14 बिंदुओं पर खामियां बताई। इसमें लाइसेंस आवेदन में पैथोलॉजिस्ट का नाम न होना, ब्लड बैंक का नाम अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक से भिन्न होना, ब्लड बैंक का बोर्ड, शैक्षिक विज्ञापन, चिकित्सा अपसिस्ट का एग्रीमेंट समाप्त होना, ब्लड स्टोरेज रेफ्रीजिरेटर व क्राइसेंट्रीफ्यूज मशीन खराब होना व परामर्शदाता की तैनाती न होना बताया गया।
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इसमें अधिकांश खामियां दूर कर ली गई हैं। क्राइसेंट्रीफ्यूज मशीन को गुरुवार को इंजीनियर बुलवाकर दुरुस्त करवाया है। रेफ्रीजिरेटर की तीन बार सर्विसिंग करवाने के बाद भी खामी दूर न हो पाने पर नए रेफ्रीजरेटर की मांग की गई है। परामर्शदाता की तैनाती के लिए भी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने पत्राचार किया है। जल्द ही केंद्रीय टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।


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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल कर संरक्षित किया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। जिले में इस यूनिट के न होने के कारण काफी दिक्कतें हो रहीं हैं।
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ब्लड बैंक में नहीं है ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड
मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में 300 यूनिट ब्लड स्टोर करने की क्षमता है। वर्तमान में 17 यूनिट ब्लड की मौजूद हैं। ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप का एक भी यूनिट ब्लड मौजूद नहीं है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तुषार ने बताया कि दो माह में जननी सुरक्षा योजना के तहत 11 गर्भवतियों को ब्लड मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में हादसों में गंभीर घायल या फिर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को ब्लड दिया जा रहा है। ब्लड बैंक में मरीजों के तीमारदारों, शिविर में मिलने वाले ब्लड का ब्लड ग्रुप भिन्न होने की वजह से ए पॉजिटिव ब्लड का स्टॉक शून्य हो गया है। जरूरत पड़ने पर पड़ोसी जिले की ब्लड बैंक से ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड मंगवाया जाएगा।
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रक्तदान से नहीं होती परेशानी, बचा सकते हैं दूसराें की जिंदगानी
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तुषार शुक्ला ने कहा कि रक्त की एक बूंद भी कृत्रिम रूप से बनाई नहीं जाती है। आवश्यकता पड़ने पर एक इंसान ही दूसरे इंसान को अपना रक्त देकर जान बचाता है। इसलिए इस महादान में हर स्वस्थ व्यक्ति को अपना योगदान करना चाहिए। लोगों में यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है। जबकि सही बात यह है कि रक्तदान करने से पहले व्यक्ति के स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच हो जाती है। एक यूनिट में 350 मिलीग्राम खून निकाला जाता है। रक्तदान के बाद खून की कमी 24 घंटे में पूरी हो जाती है।
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