हैलट अस्पताल कानपुर
13 दिन बाद नवजात की छुट्टी हो गई, पर घर ले जाने के पांच दिन बाद पुन: उसकी तबीयत खराब हुई तो फतेहपुर में ही पांच दिन नर्सिंगहोम में भर्ती कराना पड़ा। वह जैसे - तैसे रिश्तेदारों, दोस्तों से उधार लेकर इलाज कराता रहा। ढाई लाख खर्च होने के बाद 28 फरवरी को पुन: बेटे की तबीयत खराब हुई तो बाल रोग चिकित्सालय में आए। यहां एसएनसीयू में भर्ती है। वह बेटे को एक यूनिट ब्लड दे चुका है। बेटे का ब्लड ग्रुप बी-निगेटिव है। 3 मार्च को रात में डॉक्टरों ने बच्चे के लिए ब्लड का बंदोबस्त करने को कहा।