उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर के प्रधान डाकघर के एक डाक सहायक पर काले धन को सफेद करने का आरोप लगा है। उसने अपनी इस काली करतूत को अंजाम देने के लिए महिला ग्राहक की आईडी का प्रयोग किया। जांच कराई तो मामला सही निकला...
सरकार की योजना को विफल करने के प्रयास का आरोप
डेमो पिक
कानपुरः नोटबंदी के दौरान बड़ा चौराहा स्थित प्रधान डाकघर के एक डाक सहायक पर संयुक्त बचत खाता खोल काले धन को सफेद करने का आरोप लगा है। इसके लिए उसने एक महिला ग्राहक की आईडी का प्रयोग किया। महिला की शिकायत पर डाक विभाग प्रशासन ने आरोपों की जांच कराई तो मामला सही निकला। चीफ पोस्टमास्टर वीर सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर कोतवाली थाने में डाक सहायक के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। तहरीर में आशीष पर सरकार की योजना को विफल करने के प्रयास का भी आरोप लगाया गया है।
सीआईएफ नंबर से निकाली थी महिला की डिटेल
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सफीपुर प्रथम हरजेंदर नगर निवासी आशीष कुमार गुप्ता प्रधान डाकघर में बचत अनुभाग में डाक सहायक है। उसने नोटबंदी के दौरान 26 नवंबर 2016 को गाजियाबाद के विजय नगर में रहने वाली कुमारी अनुपमा तिवारी आईडी पर 2.41 लाख रुपये जमा कर संयुक्त बचत खाता खोला था। इस खाते में आशीष ने अपने घर का पता लिखाया था। इसके बाद उसी दिन खाते 24 हजार रुपये निकाल लिए। रुपये निकालने के लिए उसने फार्म पर कुमारी अनुपमा के फर्जी हस्ताक्षर भी बनाए। कुमारी अनुपमा को करीब एक महीने पहले इसका पता चला, तो उसने चीफ पोस्टमास्टर से शिकायत की। चीफ पोस्टमास्टर की जांच में मामला सही पाया गया। सोमवार को चीफ पोस्टमास्टर वीर सिंह ने आशीष के खिलाफ कोतवाली थाने में तहरीर दी। थाना प्रभारी ने बताया कि आशीष गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच की जा रही है।
डाकघर में खाता खुलवाने वाले ग्राहक को एक सीआईएफ (कस्टमर आईडेंटिटी फाइल) नंबर दिया जाता है। इस फाइल में ग्राहक का पूरा ब्योरा रहता है। आशीष ने सीआईएफ नंबर से ही कुमारी अनुपमा का ब्योरा जुटाया था। इसी की मदद से आशीष ने संयुक्त खाता खुलवाया था।