पीएम मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नये सदस्य बनाने की मुहिम में महानगर के दो विधायक असफल साबित हुए हैं। दो विधायक ही निश्चित अवधि (पांच मई) में पांच हजार सदस्य बनाने में सफल हो पाए हैं। यूपी 2017 के विधानसभा चुनाव में इन विधायकों के सामने फिर से टिकट का संकट पैदा हो सकता है।
करीब छह महीने से भाजपा नए सदस्य बनाने के कार्यक्रम में लगी है। बूथ और मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों को इसमें जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में विधायकों और सांसदों को भी टारगेट दे दिया गया। सदस्य बनाकर उनकी लिस्ट जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल थी।
यह तारीख राष्ट्रीय इकाई से तय हुई थी। कानपुर महानगर इकाई ने पांच दिन की और मोहलत मांग ली थी। इसके बावजूद धुरंधर विधायक इसमें सफल नहीं हो पाए। मजे की बात यह है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के विधायक नहीं हैं, वहां की जिम्मेदारी जिन लोगों को दी गई थी, वे भी फेल हो गए।
इसे लेकर प्रदेश स्तर पर समीक्षा चल रही है। पार्टी इसे लापरवाही मान रही है। इस पर फैसला राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली समीक्षा बैठक में लिया जाएगा। सदस्यता प्रमुख सुनील बंसल के अनुसार जो विधानसभा क्षेत्र प्रभारी हैं, उनके लिए टारगेट सिर्फ दो हजार रखा गया था।
जो विधायक सदन में व्यस्त थे, पार्टी ने उन्हें थोड़ी छूट दी है। इस लिहाज से सतीश महाना और सत्यदेव पचौरी का टारगेट में थोड़ी सी कमी है। दोनों विधायक अपना टारगेट पूरा कर लेेेंगे। विधायकों की तरफ से भेजी गई सदस्यों की सूची को कंपाइल कर प्रदेश इकाई को भेजने की तैयारी चल रही है।
- सुनील बजाज, महानगर सदस्यता प्रमुख