सुरक्षा देने और उत्पीड़न रोकने की मांग पर शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) यूपी के आह्वान पर प्राइवेट डॉक्टरों की 12 घंटे की हड़ताल में डॉक्टर एकजुट नजर नहीं आए। फूलबाग से लेकर कलेक्ट्रेट तक डॉक्टरों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी।
दोपहर 12 बजे जब डॉक्टर ज्ञापन देने के लिए फूलबाग से कलेक्ट्रेट रवाना हुए तब तक सिर्फ 109 ने ही अटेंडेंस रजिस्टर पर सिग्नेचर किए थे, जबकि आईएमए सदस्यों की संख्या ही 2158 है। इनमें 21 पदाधिकारी और 39 कार्यकारिणी सदस्य हैं।
इस प्रकार 60 की संख्या तो इन्हीं की हो गई। 109 में 60 घटा दिया जाए तो 49 डॉक्टर ही बचते हैं। प्राइवेट डॉक्टर्स ने हड़ताल को भूलकर कई कार्यक्रम जैसे अस्पताल का उद्घाटन, कैंप और प्रेस कांफ्रेस भी कीं। डॉक्टरों की कम संख्या से पदाधिकारी भी चिंतित दिखे।
प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ने की संभावना भी गलत साबित हुई। हैलट, उर्सला की ओपीडी में सामान्य दिनों से भी कम मरीज आए। डॉक्टरों में एकजुटता नहीं होने के प्रमाण पहले भी कई मौके पर दिखाई दिए हैं।
आईएमए के डॉक्टरों की हड़ताल सुबह आठ बजे से शुरू हुई। डॉक्टरों को नौ बजे फूलबाग में गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठना था लेकिन डॉक्टर 9.30 बजे के बाद पहुंचना ही शुरू हुए। काफी देर बाद बमुश्किल 60-70 डॉक्टर जुट सके। फिर एक-एक-दो-दो कर आते रहे। धरने में डॉक्टरों ने नारेबाजी की।
‘हमारी मांगें पूरी हों, चाहे जो मजबूरी हो’, ‘बचेंगे तभी तो बचाएंगे’, ‘डॉक्टरों की एक आवाज नहीं चलेगा इंस्पेक्टर राज’ आदि के नारे गूंजे। फूलबाग में धरने के बाद कलेक्ट्रेट जाकर डीएम को ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। तब भी डॉक्टरों की संख्या 109 तक ही पहुंची।
कलेक्ट्रेट में डीएम ने भी शायद डॉक्टरों के आंदोलन को तवज्जो नहीं दी और एसीएम पांच ने ज्ञापन लिया। हालांकि बाद में डीएम ने 3.30 बजे आईएमए के पांच पदाधिकारियों के साथ बैठक की और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट व लाइसेंस प्रणाली पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। धरने में आईएमए अध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय, सचिव डॉ. आरसी गुप्ता, डॉ. आरएन चौरसिया, डॉ. वीसी रस्तोगी, डॉ. अल्का शर्मा, डॉ. निलिख गुप्ता, डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी, डॉ. विकास मिश्र आदि मौजूद रहे।