यूपी के हरदोई, मिश्रिख सहित प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में सांसदों का टिकट काटकर भाजपा ने उन नेताओं को प्रत्याशी बनाया है, जो बसपा से भाजपा में आए हैं। पार्टी ने भले ही यह रणनीति के तहत किया हो, लेकिन भाजपा के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि वह सपा-बसपा के गठबंधन को हल्के में नहीं ले रही है। भाजपा की इस रणनीति से गठबंधन में बेचैनी है, क्योंकि उन्हीं के बीच का आदमी चुनाव में उतारने से गठबंधन की रणनीति पर चोट पहुंच रही है।
मिश्रिख लोकसभा की सुरक्षित सीट है। यहां पर पिछले पांच साल से अंजू बाला सांसद हैं। पहली बार इन्हें मोदी लहर में टिकट मिला, वह जीत भी गईं। मजे की बात है कि 2014 में अंजू ने बसपा के जिस प्रत्याशी अशोक रावत को शिकस्त दी थी, इस बार वही अशोक रावत उनकी जगह भाजपा प्रत्याशी बनाए गए हैं।