आजाद नगर डिपो के पास व चिड़ियाघर में कराई गई फॉगिंग
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बर्ड फ्लू के मद्देनजर नगर निगम ने सोमवार को चिड़ियाघर के आसपास रेड जोन में फॉगिंग कराई। हालांकि चिड़ियाघर से सटी सिग्नेचर ग्रींस आवासीय योजना में फॉगिंग कराना भूल गया। योजना में सैकड़ों सेवानिवृत्त अफसरों सहित पांच हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। यहां के लोगों ने जू की तरफ टहलना बंद कर दिया है। लोगों ने नगर आयुक्त से इस परिसर में फॉगिंग और चूना छिड़कवाने की मांग की। उधर, एक किलोमीटर के दायरे में बनाए गए रेड जोन में रहने वाले 25000 से ज्यादा लोगों में दहशत है।
बर्ड फ्लू से चिड़ियाघर में बब्बर शेर और मोर की मौत के बाद आसपास के एक किलोमीटर के क्षेत्र को रेड जोन घोषित किया गया है। नगर निगम के अनुसार चिड़ियाघर और उसके आसपास रेड जोन में एक बड़ी फॉगिंग मशीन और दो हैंडफॉगिंग मशीनों से दो शिफ्टों में फॉगिंग कराई गई। पहली शिफ्ट में सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम की शिफ्ट में 4:00 बजे से 6:00 बजे तक आजादनगर, आजादनगर डिपो, नवाबगंज, ख्योरा, चिड़ियाघर चौराहे से सिग्नेचर ग्रींस रोड, चिड़ियाघर से एचबीटीयू रोड, ख्यौरा आदि मोहल्लों में फॉगिंग कराई गई।
योजना के निवासी आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग के पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. निरंकार गोयल ने बताया कि बर्ड फ्लू से मौत के बाद इस योजना में रह रहे लोगों में दहशत है। नगर आयुक्त सुधीर कुमार से इस योजना में नियमित रूप से फॉगिंग, सेनेटाइजेशन कराने और चूना छिड़कवाने की मांग की है।
कोरोना गाइडलाइन का कर रहे पालन, धुएं से परेशानी
बर्ड फ्लू के कारण रेड जोन में आए सिग्नेचर ग्रींस के निवासियों में इसकी दहशत दिख रही है। क्षेत्र में लोगों ने घर से बाहर निकलना कम करने के साथ मास्क पहनना शुरू कर दिया है। लोगों ने सुबह-शाम टहलना बंद कर दिया है। बच्चों को घर से बाहर नहीं खेलने दिया जा रहा है। इतना ही नहीं चिड़ियाघर से लगे सिग्नेचर ग्रींस अपार्टमेंट में तो लोग अपनी खिड़की और दरवाजे तक नहीं खोल रहे।
अपार्टमेंटवासियों का कहना है कि जानवरों का जब अंतिम संस्कार किया जाता है, तो चिमनी से उठते धुएं को देखकर डर लगता है। अभी शेर और मोर की मौत के बाद उठे धुएं के डर से लोग खिड़कियां तक नहीं खोल रहे हैं। जब कोई जानवर मर जाता है तो उसे चिड़ियाघर के पीछे रखते हैं और उसकी दुर्गंध अपार्टमेंट में आती है। विद्युत मशीन से उसका अंतिम संस्कार करते हैं तो चिमनी से उठता धुआं अपार्टमेंट में आता है। निदेशक से कई बार इस मामले को उठाया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। बर्ड फ्लू की वजह से लगभग सभी अपार्टमेंटवासियों ने अपने घरों के बाहर जाली लगवा ली है।
रैना बसेरा में 30 बेड का बर्ड फ्लू वार्ड
कार्डियोलॉजी के पास रैन बसेरा में 30 बेड का बर्ड फ्लू वार्ड बन सकता है। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. संजय काला ने डीएम को पत्र लिखा है। डॉ. काला ने बताया कि रैन बसेरा में बेड की व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके साथ ही बर्ड में फ्लू में इस्तेमाल होने वाली टेमी फ्लू समेत अन्य दवाओं के साथ स्टाफ भी है।
संक्रामक रोग अस्पताल का पुराना भवन कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में मिल गया है। अस्पताल को पास के स्वास्थ्य केंद्र में शिफ्ट किया गया है। डीएम को लिखे पत्र में बताया गया कि संक्रामक रोग चिकित्सालय में 30 बेड संचालित थे। स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड ही संचालित हो पा रहे हैं। इससे अन्य रोगियों में क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा रहता है। यहां 18 जिलों के रोगी इलाज के लिए आते हैं। पत्र में मांग की गई कि जल निगम सीएनडीएस कार्डियोलॉजी का जो भवन बना रहा है, उसके नजदीक रैन बसेरा में संक्रामक रोग अस्पताल शिफ्ट किया जाए। मेडिकल कॉलेज का स्थायी संक्रामक रोग अस्पताल बन जाने के बाद रोगियों को रैन बसेरा से शिफ्ट कर दिया जाएगा।
सामान्य बुखार रोगियों की ली गई हिस्ट्री
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सामान्य बुखार के रोगियों की हिस्ट्री ली और सभी को सचेत रहने की सलाह दी। सोमवार को टीम ने सर्वे किया और सभी स्थानीय लोगों को भी जागरूक किया। वहीं, चिड़ियाघर के सभी कर्मियों की जांच के नमूने भी इकट्ठे कर लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट मंगलवार तक आने की संभावना है। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि जिन लोगों को बुखार आ रहा है, उनसे जरूरी जानकारी जुटाई गई है। इसमें अब तक कुछ भी संदिग्ध नहीं निकला है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।