कानपुर देहात। बिकरू कांड में आरोपी बर्खास्त एसओ, एसआई व एक अन्य आरोपी की तरफ से निर्दोष होने के प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किए गए थे।
बुधवार को कोर्ट ने एसआई व एक अन्य आरोपी का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। वहीं, बर्खास्त एसओ के प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए 10 जून की तारीख नियत की है।
दो जुलाई 2020 को बिकरू कांड के बाद आरोपी बनाए गए बर्खास्त एसआई केके शर्मा, राजेंद्र मिश्रा व बर्खास्त तत्कालीन एसओ विनय तिवारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए अदालत में आरोप मुक्त किए जाने का प्रार्थना पत्र देकर गलत फंसाने की दलील दी थी।
वहीं राजेंद्र मिश्रा की तरफ से अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि उसके पुत्र प्रभात मिश्रा का पुलिस ने एनकांउटर किया था। मामले में जब मानवाधिकार का प्रश्न उठाया गया तो पुलिस ने उसे आरोपी बना दिया।
बर्खास्त तत्कालीन एसओ विनय तिवारी की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि घटना के वक्त विनय तिवारी दबिश वाली टीम में मौजूद थे। उन्होंने मुठभेड़ के दौरान फायरिंग भी की थी और घटना की रिपोर्ट थाना चौबेपुर में लिखाई थी। मामले में उन्हें झूठा फंसाया गया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि बुधवार को कोर्ट ने बर्खास्त एसआई केके शर्मा व आरोपी राजेंद्र मिश्रा की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है। वहीं, बर्खास्त एसओ विनय तिवारी के प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए 10 जून की तिथि तय की है।
तीन आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि बिकरू कांड से जुड़े एक मामले में आरोपी अंजली दुबे, अमित उर्फ छोटे बउआ और दिनेश कुमार के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। इन सभी आरोपियों ने शस्त्र लाइसेंस फर्जी हलफनामा देकर प्राप्त किए थे।
फर्जी सिम मामले में रिचा दुबे की सुनवाई कल
जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि फर्जी सिम मामले में आरोपी बनाई गई विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे के मामले की सुनवाई भी एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता पवनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि मुख्य मामले की सुनवाई होने के कारण रिचा दुबे के मामले की सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने सुनवाई के लिए अब 10 जून की तिथि तय की है।