कानपुर के चर्चित बिकरू कांड में दोषी पाए गए बजरिया इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव एक बार फिर विवादों से घिर गए हैं। गैंगस्टर के केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की जांच शुरू हो गई है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
हैरानी की बात ये है कि बिकरू कांड में दोषी पाए जाने के बावजूद उनकी थानेदारी बरकरार है। अभी भी उन पर कार्रवाई नहीं की गई है।चमनगंज पुलिस ने आदिल, अनवारुल हक और साबिर पर गैंगस्टर लगाया था। जांच बजरिया इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव को सौंपी गई थी।
इंस्पेक्टर राममूर्ति ने जांच के बाद गैंगस्टर के आरोपियों को क्लीन चिट देकर मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। चर्चा ये भी है कि इसमें इंस्पेक्टर ने बाकायदा आरोपियों से सांठगांठ कर खेल किया। अफसरों ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच के आदेश दिए हैं।
मालूम हो कि इंस्पेक्टर राममूर्ति को बिकरू कांड की एसआईटी ने दोषी ठहराया था। आरोप था कि जय कांत बाजपेई व उसके भाइयों से उनकी मिलीभगत थी। तब भी इंस्पेक्टर की थानेदार की कुर्सी बरकरार है। जबकि इसी श्रेणी में दोषी पाए गए लखनऊ के एक इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर थाने का चार्ज वापस ले लिया गया था।