बदमाशों की हैसियत पर भी पुलिस की निगाह
मुनुआ के आर्थिक साम्राज्य और रहने के तौरतरीके ने भी पुलिस को सोचने पर मजबूर किया है। उसने जिस तरह से घर को एक सुरक्षित किले के रूप में तब्दील कर रखा था, यह भी पुलिस के सामने नई चुनौती है। पुलिस अब हर हिस्ट्रीशीटर की आर्थिक हैसियत और जीवन यापन के तरीके के साथ ही आवास की संरचना की भी पड़ताल करने में जुट गई है। आपराधिक गतिविधियों में शामिल बदमाशों के नए बने मकानों पर भी नजर लगी है।
अब दबिश के दौरान इन पहलुओं पर रहेगा फोकस
- बदमाश से जुड़ी सभी ताजा जानकारी रखी जाएगी।
- उसकी ताकत और हैसियत की जानकारी जुटाई जाएगी।
- सुरक्षा व्यवस्था के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद रहेगा।
- भाग निकलने के सभी संभावित प्वाइंट पर पुलिस तैनात रहेगी।
- बदमाश की हाल की गतिविधियों का पता लगाया जाएगा।
- आसपास के सीसीटीवी कैमरों पर भी रहेगी नजर।
- बदमाश के भेष बदलने या हुलिया बदलने की रखी जाएगी जानकारी।
मुनुआ के अलग-अलग रंग, बाबा तो कभी बदमाश
पुलिस के लिए किरकिरी बना हिस्ट्रीशीटर मुनुआ हुलिया बदलने में माहिर है। वह कभी बाबा का रूप धारण कर लेता है, तो कभी दूसरे हुलिए में सामने आता है। वर्ष 2014 में जेल से छूटने के बाद हिस्ट्रीशटर मुनुआ ने पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग लुक बदले। कभी डॉक्टर शेव में तो कभी साधू-सन्यासियों का रूप धरे रहता था। इसके अलावा भी उसे कई लुक में देखा गया। पिछले कुछ सालों से वह सफेद दाढ़ी और सफेद बालों में रह रहा था। एक सप्ताह पहले ही उसने दाढी और मूंछ साफ करा दी। मुठभेड़ के दौरान वह सिर्फ मुंछों में ही था। उसके बदले रूप को लेकर भी लोगों में खूब चर्चा है।
पुलिस के नोटिस जवाब की मोहलत आज खत्म
विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के धरनीधीरपुर नगरिया गांव में 25 दिसंबर की शाम मुठभेड़ के बाद हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ की मुश्किलें लगातार बढ़ गई हैं। चार दिनों में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसके मकान को अपराध का अड्डा मानते हुए नोटिस भेज रखी है। उसे 30 दिसंबर तक जवाब देने का मौका दिया गया है। इसी के तहत शनिवार की शाम तक उसे अपना जवाब देना है। जवाब देने या न देने के आधार पर ही पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।
मकान को जमींदोज करने की तैयारी है
मुठभेड़ के बाद तीन दिनों तक राज्सव टीम और फॉरेंसिक टीम की अलग-अलग बिंदुओं से की गई पड़ताल के बाद पुलिस ने मुनुआ यादव के मकान को आपराधिक गतिविधियों का अड्डा मानते हुए तहसील प्रशासन के माध्यम से नोटिस जारी करवा रखा है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती मुनुआ को नोटिस दी गई है। 30 दिसंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि उसके मकान को जमींदोज करने की तैयारी है। उसके पहले के सभी कानूनी पहलुओं का पालन किया जा रहा है ताकि आगे कोई अड़चन न हो।
मेडिकल कॉलेज में भर्ती है, जवाब पर निगाह
पुलिस की गोली से जख्मी मुनुआ यादव और नाबालिग बेटा मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। प्रशासन ने उसे मेडिकल कॉलेज में ही नोटिस तामील कराई थी। अब भी वह मेडिकल कॉलेज में है। उसे किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। जिस वार्ड में है, उसके बाहर पुलिस का सख्त पहरा है। मेडिकल स्टाफ के अलावा किसी को वार्ड में जाने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में वह प्रशासन की नोटिस का जवाब किस तरह देगा इसी पर सभी की निगाह लगी है।
पत्नी जेल में, बेटों ने भी बनाई दूरी
लोगों के बीच दहशत का दूसरा नाम बना मुनुआ यादव अब तन्हा हो गया है। उसके साथ वारदात में शामिल रही पत्नी श्यामा देवी को पुलिस ने उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके दो बड़े बेटे अमित और गौरव दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। इस वारदात के बाद से दोनों ने ही दूरी बना रखी है। नाबालिग बेटा जो घर पर था, वह भी पुलिस का गुनहगार बन चुका है। 11 साल की बेटी को पुलिस ने रिश्तेदार के हवाले कर दिया है।
हिस्ट्रीशीटर और नाबालिग पुत्र आज होगा डिस्चार्ज
विशुनगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में जख्मी हिस्ट्रीशीटर मुनुआ यादव और उसके नाबालिग पुत्र को शनिवार को मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज किया जाएगा। पिछले पांच दिनों से दोनों को मेडिकल कॉलेज में एक ही वार्ड में रखकर इलाज चल रहा है। सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह के मुताबिक अब दोनों की हालत में सुधार है। डॉक्टरों की ओर से डिस्चार्ज की तैयारी की जानकारी मिलते ही शुक्रवार को दोनों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। डिस्चार्ज होने के बाद मुनुआ को जिला जेल और नाबालिग पुत्र को फर्रुखाबाद स्थित बाल सुधार गृह भेजने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहा बरामद बंदूक का लाइसेंस
विशुनगढ़ पुलिस पर हमले के आरोपी हिस्ट्रीशीटर मुनुआ यादव ने जिस बंदूक से सिपाही सचिन राठी पर गोली चलाई थी, उसे तो बरामद कर लिया गया है। उसका लाइसेंस नहीं मिला है। पिछले तीन दिनों से कन्नौज पुलिस की टीम कानपुर में बंदूक की खरीदारी से जुड़ी जानकारी के लिए दस्तावेज खंगाल रही है। बताया गया है कि बंदूक कानपुर के एक दुकान से वर्ष 1995 में खरीदी गई थी, लेकिन इसे किसके नाम पर खरीदा गया था, यह साफ नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि अशोक यादव के नाम से जिले में किसी असलहे का लाइसेंस जारी नहीं है। ऐसे में उसके घर से बंदूक मिलना संदेह पैदा कर रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि लाइसेंस किसी दूसरी जगह से तो नहीं जारी हुआ, लेकिन उसके पहले बंदूक की खरीद से जुड़े कागज की तलाश की जा रही है।