बिकरू कांड से पहले तक कभी पूरे बिकरू गांव में खुशियां और चहल पहल रहती थी। लोग धूमधाम से अपने कार्यक्रम अपने गांव द्वार पर ही आयोजित करते थे। बिकरू कांड और दुर्दांत विकास दुबे के एनकाउंटर के चार साल बाद भी पूरे गांव में मातम सा छाया हुआ है।
अमर उजाला टीम ने जब गांव जाकर लोगों से बात की तो पता चला कि किसी शादी या कार्यक्रम को करने के लिए लोग दूसरे गांव में रहने वाले रिश्तेदारों के घर जाना पड़ता है। नाम न छापने की शर्त पर मोहल्ले के युवक ने बताया कि रिश्ता तय करने को दौरान अगर बिकरू बता दिया जाए तो लोग विकास दुबे वाला बिकरू कहकर रिश्ता करने में टाल मटोल करने लगते हैं। इस वजह से लोग न चाहते हुए भी दूसरे गांवाें का रुख करते हैं। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे टीम ने बिकरू पंचायत भवन में पंचायत सहायक सर्वेश कुमार से विकास दुबे के घर का रास्ता पूछा तो वह हड़बड़ा गए।
हालांकि कुछ सेकेंड में खुद को संभालकर साथ चले और खंडहर दिखाते हुए बोले कि यही है विकास पंडित की कोठी। गांव के खासकर विकास दुबे के गुर्गों के घर बुजुर्ग व महिलाएं तो थीं लेकिन कोई बात करने को तैयार नहीं था। पूछने पर कहते, पुलिस प्रशासन से पूछो, हम जेल नहीं जाना चाहते। एक बुजुर्ग ने बताया जिन घरों पर चढ़कर और जिन लोगों ने पुलिस टीम पर गोली चलाई थी, उन घरों में आज भी मातम सा माहौल है। हमला करने वालों के रिश्तेदार या मददगार का पता चल जाए तो पुलिस उसके पीछे पड़ जाती है। इसलिए लोग हाल चाल लेना तो दूरी किसी के गम में भी शरीक होने भी नहीं आते।
संदीप कुमार नामक युवक ने अमर और अतुल दुबे के घर दिखाते हुए बताया कि घटना के बाद आज तक कोई यहां नहीं आया। एक दिन दो लोग आए लेकिन वह भी बिखरा पड़ा सामान देख लौट गए। आज भी अतुल व अमर के घर का सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा दिखा। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बउवा के कच्चे घर में दो लोग दिखे लेकिन बात करने की कोशिश की गई तो वह खेतों की ओर चले गए। पुलिस पर गोली चलाने के आरोपी प्रभात के घर पर भी सन्नाटा ही पसरा मिला। काफी देर तक आवाज देने पर प्रभात के पिता राजेंद्र, मां गीता, बहन शिवा मिलीं, लेकिन दरवाजा बंद कर दिया। उधर सुषमा पांडे मिली तो उन्होंने कहा कि बस अब सब ठीक हो जाए।
चार किमी दूर खुला पुलिस सहायता केंद्र
बिकरू कांड के बाद स्थानीय लोगों ने बिकरू गांव में पुलिस चौकी खोले जाने की मांग की थी। लेकिन पुलिस ने बाबा कुआं चौबेपुर-शिवली मार्ग पर अस्थाई पुलिस सहायता केंद्र खोला है। यहां यदा कदा पुलिस कर्मी आकर वाहन चेकिंग या पड़ाव लेते हैं।
करीबी बता इलाके में रौब गांठ रहा दूर का भांजा
नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि विकास दुबे का दूर से भांजा बताने वाला एक युवक इन दिनों फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। विकास दुबे का भांजा बताकर युवक इलाके में मिट्टी खनन, रजबहे की सिल्ट बिक्री सहित जेसीबी आदि चलवाने का काम कर रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि वह स्थानीय नेताओं के साथ भी लगातार संपर्क में रहता है और राजनीति में हाथ आजमाने के लिए भी तैयारी कर रहा है।
निर्दोष होने के बाद भी काट रहे सजा
विकास दुबे की बहन चंद्रकांता की शादी क्षेत्र के बसने गांव निवासी दिनेश तिवारी से हुई थी। पति पत्नी का दावा है कि सालों से उनका विकास से संपर्क नहीं था लेकिन बिकरू कांड के बाद पुलिस ने उनके बेटे शिव तिवारी को आरोपी बना दिया। उनका कहना है कि घटना की रात उसके बिकरू में न होने के संबंध में उनके पास सीसीटीवी फुटेज व कई साक्ष्य हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं कर रहा। नतीजतन उनका बेटा बेगुनाह होकर भी जेल की सजा काट रहा है।