सभी सरकारी संस्थानों में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति यूपीएसआईसी में रजिस्टर्ड वेंडर (वर्कर प्रोवाइडर एजेंसी) के माध्यम से होती है। सभी विभाग यूपीएसआईसी को अपनी डिमांड भेजते हैं। इसके बाद यूपीएसआईसी कागजी कार्रवाई करते हुए किसी एजेंसी को जिम्मेदारी देता है। फिर वह एजेंसी कर्मचारी मुहैया कराती है। कर्मचारियों का वेतन विभाग यूपीएसआईसी को भेजता है और यूपीएसआईसी वेतन एजेंसी को सौंप देता है। इसके बाद एजेंसी वाले कर्मचारियों का भुगतान करते हैं। एजेंसियां नियमानुसार कर्मचारियों के वेतन का पांच प्रतिशत हिस्सा कमीशन के तौर पर ले सकती हैं।
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श्री बालाजी इंजीनियरिंग वर्क्स एजेंसी पर केस्को के संविदा कर्मचारियों के भी वेतन में घालमेल करने का आरोप लग चुका है। यूपीएसआईसी के एमडी के मुताबिक एजेंसी की ओर से संविदा कर्मियों को चेक के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है जबकि आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जाना चाहिए। ऐसे में एजेंसी पर जीएसटी भुगतान में गबन, ईपीएफ, ईएसआई भुगतान में भी खेल करने का संदेह है।