बेशकीमती संपत्तियों या बंगलों को कौड़ियों के भाव में कानपुर के तमाम धनाढ्यों को बेचा गया था। वर्ष-2006 में इसकी शिकायत कपड़ा मंत्रालय में की गई थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
कौड़ियों के दाम पर बेचे गए बीआईसी के 19 बंगलों की सेल डीड निरस्त होने के बाद अब खेल में शामिल अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार बंगलों की बिक्री में हर कदम पर अनियमितता बरतने वाले अफसरों के खिलाफ विभाग जल्द एफआईआर दर्ज कराएगा। बीआईसी की बंदी से पहले की गई इस कार्रवाई को बड़ा कदम माना जा रहा है।
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उधर, बंगलों की बिक्री में धांधली को लेकर सीबीआई की जांच रिपोर्ट भी जल्द आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि बीआईसी की लाल इमली और धारीवाल मिल को चलाने के लिए कैबिनेट और बाइफर ने रिवाइवल प्लान को मंजूरी दी थी। बीआईसी की सरप्लस संपत्तियों की वर्ष-2003 में बिक्री की गई।
इन बेशकीमती संपत्तियों या बंगलों को कौड़ियों के भाव में कानपुर के तमाम धनाढ्यों को बेचा गया था। वर्ष-2006 में इसकी शिकायत कपड़ा मंत्रालय में की गई थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। नवंबर 2018 में बीआईसी की संपत्तियां खरीदने वाले एक शख्स की पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की।
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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में मामला होने की बात कही थी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बंगलों की बिक्री में अनियमितता के आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। 19 नवंबर 2018 को सीबीआई ने बीआईसी के पूर्व कंपनी सचिव केसी वाजपेई और सीएमडी केएस दुग्गल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।